गढ़वा की बेटी जयप्रदा बनीं असिस्टेंट प्रोफेसर, क्षेत्र में खुशी की लहर
दर्जिया की बेटी जयप्रदा ने बोकारो स्टील माइन्स कॉलेज में दर्शनशास्त्र विभाग में संभाला पद; क्षेत्र में गौरव का माहौल
गढ़वा :–संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति जब अपनों के आशीर्वाद से मिलती है, तो सफलता की नई इबारत लिखी जाती है। गढ़वा जिले के विशुनपुरा प्रखंड अंतर्गत दर्जिया गाँव की बेटी और कांडी प्रखंड के मझिगावां की बहू जय प्रदा कुमारी ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्हें बोकारो स्टील माइन्स कॉलेज, भवनाथपुर में दर्शनशास्त्र (Philosophy) की सहायक प्रोफेसर नियुक्त किया गया है।
जय प्रदा कुमारी की इस सफलता के पीछे एक अत्यंत भावुक कहानी जुड़ी है। अपनी नियुक्ति पर भावुक होते हुए उन्होंने इस उपलब्धि को अपने दिवंगत भसुर स्व. राकेश चौबे को समर्पित किया। उन्होंने बताया-
“मेरे भसुर स्वर्गीय राकेश चौबे जी की यह हार्दिक इच्छा थी कि मैं शादी के बाद भी अपनी पढ़ाई कभी न छोड़ूँ। वह हमेशा मुझे आत्मनिर्भर बनते और समाज में एक मुकाम स्थापित करते देखना चाहते थे। आज उनकी कमी महसूस हो रही है, लेकिन यह सफलता उन्हीं के आशीर्वाद, अटूट विश्वास और समर्थन का प्रतिफल है। उन्होंने मुझे पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ सपनों को जीने का हौसला दिया था।”
जय प्रदा की संपूर्ण उच्च शिक्षा नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (NPU), मेदिनीनगर से संपन्न हुई है, जहाँ उन्होंने अपनी मेधा का परिचय दिया:
स्नातक (B.A): वर्ष 2011 में नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण।
स्नातकोत्तर (M.A):वर्ष 2013 में इसी विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में मास्टर डिग्री प्राप्त की।
बी.एड (B.Ed): वर्ष 2018 में 79.08% अंकों के साथ श्रेष्ठता सिद्ध की।
इसके साथ ही उन्होंने ADCA और ग्रामीण विकास (PGDRD) जैसे तकनीकी पाठ्यक्रमों में भी विशेष योग्यता हासिल की है।
जय प्रदा क्षेत्र के प्रसिद्ध शिक्षक रहे स्व. नागेश्वर प्रसाद शुक्ल की पौत्री और श्री ब्रजेश कुमार शुक्ल की सुपुत्री हैं। उन्हें अपने बड़े भाई डॉ. भारद्वाज शुक्ल (असिस्टेंट प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय) का निरंतर कुशल मार्गदर्शन प्राप्त हुआ, जिन्होंने उनकी शैक्षणिक यात्रा को हर कदम पर संबल दिया।
उनकी इस नियुक्ति की आधिकारिक सूचना कॉलेज के सचिव श्री भानु प्रताप शाही के हस्ताक्षर द्वारा निर्गत की गई है। जय प्रदा की यह सफलता झारखंड के ग्रामीण अंचलों की उन तमाम बेटियों और बहुओं के लिए एक मिसाल है, जो शादी के बाद भी अपने सपनों को साकार करने का साहस रखती हैं।

