धुरकी में राष्ट्रीय पोषण माह के तहत गोद भराई और मुंह जूठी रस्म कार्यक्रम आयोजित

धुरकी में राष्ट्रीय पोषण माह के तहत गोद भराई एवं मुंह जूठी रस्म कार्यक्रम

धुरकी प्रतिनिधि।। बाल विकास परियोजना कार्यालय धुरकी में ग्रामीण क्षेत्रों में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के तहत सेविका एवं सहायिका द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के बीच गोद भराई तथा बच्चों के मुंह जूठी रस्म कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ धुरकी बीडीओ अनुरंजन झा, सी ओ विमल कुमार सिंह, महिला पर्यवेक्षिका अंजना कुमारी, पिंकी राज मेहता, संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में महिलाओं एवं ग्रामीणों को पोषण, स्वास्थ्य और बच्चों के बेहतर विकास के प्रति जागरूक किया गया।
कार्यक्रम के दौरान गर्भवती महिलाओं की गोद भराई की रस्म पारंपरिक तरीके से पूरी की गई। वहीं छोटे बच्चों को अन्नप्राशन के रूप में मुंह जूठी रस्म कराई गई। इस दौरान सेविका एवं सहायिका ने महिलाओं को गर्भावस्था से लेकर प्रसव के बाद तक खान-पान एवं स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारी दी। महिलाओं को बताया गया कि गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक एवं संतुलित आहार का सेवन मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।
सेविकाओं ने कहा कि गर्भवती महिलाओं को अपने भोजन में हरी सब्जियां, दाल, मौसमी फल, दूध एवं अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए। वहीं प्रखण्ड के सुदूरवर्ती गांवों टोले के सेविका एवं सहायिकाओं ने कई प्रकार के व्यंजन बनाकर लाए थे। इसके साथ सेविका ने बताया कि आयरन एवं कैल्शियम की गोलियों का नियमित सेवन तथा समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना भी आवश्यक है। उन्होंने गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाने की अपील की।
मुंह जूठी रस्म के दौरान छोटे बच्चों के अभिभावकों को छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने के महत्व की जानकारी दी गई। छह माह के बाद बच्चे को मां के दूध के साथ उम्र के अनुसार पौष्टिक एवं संतुलित ऊपरी आहार देने की सलाह दी गई। सेविकाओं ने कहा कि बच्चों के शुरुआती वर्षों में मिलने वाला उचित पोषण उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम में साफ-सफाई, हाथ धोने की आदत, स्वच्छ पेयजल के उपयोग तथा बच्चों के नियमित टीकाकरण पर भी विशेष जोर दिया गया। ग्रामीण महिलाओं को कुपोषण के लक्षणों की पहचान करने तथा आवश्यकता पड़ने पर आंगनबाड़ी केंद्र एवं स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की जानकारी दी गई।
सेविका एवं सहायिका ने कहा कि राष्ट्रीय पोषण माह का उद्देश्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों तक पोषण संबंधी सही जानकारी पहुंचाकर व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना है। इस तरह के आयोजन से महिलाओं और अभिभावकों में जागरूकता बढ़ती है तथा स्वस्थ मां और स्वस्थ बच्चे की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण महिलाएं, बच्चे, अभिभावक एवं आंगनबाड़ी कर्मी उपस्थित थे।