छतरपुर में एक दिन में दो मौतों से मचा हड़कंप, अनुमंडलीय अस्पताल की व्यवस्था पर उठे सवाल

छतरपुर बना हादसों का शहर, एक दिन में दो मौतों ने झकझोरा – अनुमंडलीय अस्पताल की लचर व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

छतरपुर (पलामू)। छतरपुर पाटन विधानसभा क्षेत्र में हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता और छतरपुर पाटन विधानसभा क्षेत्र से विधायक पद के प्रत्याशी ने आज एक वीडियो जारी कर छतरपुर की बिगड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर तीखा हमला बोला है।

उन्होंने कहा कि सबसे पहले आप सभी को जोहार। आज छतरपुर पूरा दिन हादसों का दिन रहा है। एक दिन में दो-दो जानें चली गईं, कई लोग घायल हैं।

उन्होंने बताया कि पहली घटना में खाटीन निवासी 13 से 15 वर्षीय बच्चे की आहर में डूबने से मौत हो गई। दूसरी बड़ी घटना मसीहानी बाईपास पर हुई, जहां बाइक और कार की टक्कर में बगैया निवासी 60 वर्षीय जालिम भुइयां की मौत हो गई, जबकि दूसरा साथी गंभीर रूप से घायल है।

अस्पताल की व्यवस्था बनी मौत की वजह

प्रत्याशी ने कहा कि सड़क हादसों में मौत की सबसे बड़ी वजह अस्पताल की लचर व्यवस्था है। जब भी कोई घायल अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचता है तो उसे समय पर इलाज नहीं मिल पाता।

कभी चिकित्सक अपने विश्राम कक्ष में विश्राम करते रहते हैं, तो कभी आउटसोर्सिंग के भरोसे इलाज चलता है। आपात स्थिति में मरीजों को रेफर करने के लिए घंटों एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ता है, कई बार तो रास्ते में ही एंबुलेंस खराब हो जाती है। ऐसी स्थिति में मरीज न तो छतरपुर में रह पाता है और न ही मेदिनीनगर पहुंच पाता है।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर भी देखा गया कि घंटों हंगामा और जनप्रतिनिधि के फोन के बाद ही जरूरतमंद को एंबुलेंस मिलती है। यह कैसी व्यवस्था है?

जनप्रतिनिधियों पर भी साधा निशाना

उन्होंने कहा कि छतरपुर की आवाज कई वर्षों से उठ रही है, लेकिन आज तक कोई सुधार नहीं हुआ। जिस विधानसभा क्षेत्र के मंत्री हों, वहां यदि यह हाल है तो पूरे झारखंड का क्या हाल होगा।

उन्होंने सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से अपील की कि यदि आप क्षेत्र की इस हालत पर मौन दर्शक बने हैं तो आप जनप्रतिनिधि कहलाने लायक नहीं हैं। जनप्रतिनिधि का मतलब ही होता है जनता की आवाज बनना।

प्रखंड में भ्रष्टाचार, जमीन म्यूटेशन में लंबी सूची, बिजली और अस्पताल की चरमराई व्यवस्था, सभी पर ध्यान देने की जरूरत है।

अंत में उन्होंने पलामू उपायुक्त, सिविल सर्जन और वित्त मंत्री से अनुरोध किया कि जिस तरह पूरे जिले में व्यवस्थाएं सुधारी जा रही हैं, एक नजर छतरपुर अनुमंडलीय अस्पताल पर भी डाली जाए। वर्षों से यहां की जनता इलाज के लिए भटक रही है, साधारण दवा तक सही से नहीं मिल पाती, इसकी लंबी शिकायतें कागजों और सोशल मीडिया पर पड़ी हैं।

उन्होंने कहा कि सिर्फ क्षेत्र में भ्रमण और दिखावे से काम नहीं चलेगा, व्यवस्था को मजबूत करना होगा तभी आम जनता को लाभ मिलेगा।