छठव्रतियों की सेवा के लिए तैयार हुआ ‘खुला मंच’ व्हाट्सएप ग्रुप

छठव्रतियों की सेवा के लिए तैयार हुआ ‘खुला मंच’ व्हाट्सएप ग्रुप
मेदिनीनगर,26 अक्टूबर।
सामाजिक कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाने वाला खुला मंच व्हाट्सएप ग्रुप इस वर्ष भी छठव्रतियों की सेवा हेतु पूरी तत्परता के साथ सक्रिय हो गया है।मंच के सदस्य सुभाष चंद्र बोस चौक से लेकर कोयल नदी तट तक छठव्रतियों की सुविधा और व्यवस्था सुनिश्चित करने में जुटे हुए हैं।
मंच के अध्यक्ष नवदीप सिंह ऋषि,एडमिन रजनीश सिंह, प्रवक्ता नवीन तिवारी,कोषाध्यक्ष राहुल मिश्रा एवं सह-कोषाध्यक्ष रितेश कुमार टिंकू के नेतृत्व में पिछले एक सप्ताह से सफाई व्यवस्था,यातायात नियंत्रण,जल आपूर्ति और प्रकाश व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सक्रिय पहल की जा रही है।
हर वर्ष की तरह इस बार भी खुला मंच द्वारा कोयल नदी तट जाने वाले मार्ग पर छठव्रतियों और श्रद्धालुओं के बीच फल, पानी एवं आवश्यक सामग्रियों का वितरण किया जाएगा।वहीं मंच के सदस्यों के द्वारा छठव्रतियों व श्रद्धालुओं का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया जाएगा।मंच के सदस्यों के अनुसार यह सेवा कार्य पिछले कई वर्षों से निरंतर चल रहा है,जिसका उद्देश्य व्रतियों को सुविधा प्रदान करना और सामूहिक आस्था को मजबूत करना है।
मंच के प्रवक्ता नवीन तिवारी ने बताया कि खुला मंच केवल एक व्हाट्सएप ग्रुप नहीं बल्कि “सामाजिक चेतना का प्रतीक” बन चुका है।उन्होंने कहा
हमारा उद्देश्य समाज में सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार करना और ज़रूरत के हर मौके पर लोगों के साथ खड़ा रहना है। छठव्रतियों की सेवा उसी भावना का विस्तार है।
अध्यक्ष नवदीप सिंह ऋषि ने कहा कि मंच के सदस्य प्रतिदिन छठ घाटों की सफाई व्यवस्था, ट्रैफिक समन्वय और सहयोग कार्यों में नगर निगम एवं स्थानीय प्रशासन की सहायता कर रहे हैं। उन्होंने बताया,
“खुला मंच की यह सेवा परंपरा आने वाले वर्षों में और बड़े स्तर पर जारी रहेगी।”
इस दौरान मंच के वरिष्ठ सदस्य अमर सहाय,मनोज सिंह, अविनाश देव,राज कुमार गुप्ता, बिजय गुप्ता,राजेश गुप्ता (रेहला),अरविंद शुक्ला,आनंद मोहन,अरविंद अग्रवाल, शशिकांत आरडी,प्रभात अग्रवाल,बबलू चावला,मनीष ओझा,नीरज राज,नवीन शरण, पदमाकर वर्मा सहित सभी सदस्य सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं।
सामाजिक कार्यों में हमेशा अग्रणी रहने वाला खुला मंच अब मेदिनीनगर में जनसेवा की एक सशक्त पहचान बन चुका है। शहरवासी इस पहल की सराहना कर रहे हैं और इसे छठ पर्व की सामूहिक आस्था और सेवा भावना से जोड़कर देख रहे है।