छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही तानाशाह सरकार और भ्रष्ट NTA, परीक्षाओं का जनाजा निकलना सत्ता की निकम्मापन का सबूत: निशांत चतुर्वेदी
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा आयोजित असफल कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट-अंडरग्रेजुएट परीक्षा पर प्रेस रिलीज जारी करते हुए झारखंड छात्र मोर्चा के जिलाध्यक्ष निशांत चतुर्वेदी ने कहा की आज देश का युवा सड़कों पर रोने को मजबूर है। कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट-अंडरग्रेजुएट परीक्षा में आई तकनीकी खामी कोई सामान्य भूल नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के खिलाफ एक सोची-समझी साजिश है। बायोमेट्रिक पंजीकरण के बाद भी छात्रों को परीक्षा केंद्रों से बाहर धकेल दिया गया और देश भर में 3,765 छात्रों को बायोमेट्रिक उपस्थित बनाने के बाद भी परीक्षा छूट गई। जिलाध्यक्ष निशांत चतुर्वेदी ने कहा कि कड़कती धूप में भूखे-प्यासे बैठकर परीक्षा का इंतजार करने वाले हजारों छात्रों और उनके गरीब अभिभावकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया है। घंटों इंतजार कराने के बाद सिर्फ एक ‘माफी’ मांगकर एनटीए अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता। यह छात्रों के भविष्य की हत्या है। सरकार का डिजिटल इंडिया का दावा पूरी तरह खोखला साबित हो चुका है, जहां एक परीक्षा ढंग से आयोजित कराने की औकात इस सिस्टम की नहीं है।
निशांत चतुर्वेदी ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा, “चाहे नीट (NEET)में महाघोटाला हो, एसएससी( SSC) का भ्रष्टाचार हो, सीबीएसई की विफलता हो या अब CUET का यह मजाक—इस देश में कोई भी परीक्षा पवित्र नहीं बची है। हर परीक्षा का जनाजा निकल चुका है। परीक्षाओं का लगातार रद्द होना, लीक होना या तकनीकी खराबी का शिकार होना सीधे तौर पर वर्तमान सरकार के निकम्मेपन और परीक्षा कराने वाली संस्थाओं की मिलीभगत को दिखाता है। सरकार युवाओं को रोजगार और उच्च शिक्षा देने में पूरी तरह नाकाम हो चुकी है और अब जानबूझकर ऐसी धांधलियां करवाई जा रही हैं। बार-बार विफल हो रही इस निकम्मी एजेंसी को तुरंत बर्खास्त कर इसके सभी वरिष्ठ अधिकारियों को जेल भेजा जाए साथ ही देश के शिक्षा तंत्र को बर्बाद करने की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से तुरंत इस्तीफा दें। मोदी सरकार अपनी इस छात्र-विरोधी मानसिकता को सुधारे, वरना गढ़वा से शुरू हुआ यह आक्रोश पूरे देश की सड़कों पर दिखेगा।

