अंचल अमीन के परिवार के नाम जमीन खरीद और डायरेक्ट जमाबंदी पर उठे सवाल
बेंगाबाद अंचल से जुड़ा जमीन का एक मामला अब चर्चा में है। हल्का नंबर 7, मौजा कोईरीडीह, थाना नंबर 48, खाता नंबर 10 और प्लॉट नंबर 5 से संबंधित इस मामले में उपलब्ध बताए जा रहे दस्तावेजों के आधार पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं।
दावा है कि उक्त जमीन की खरीद अंचल अमीन अर्जुन प्रसाद वर्मा की धर्मपत्नी के नाम हुई है। इसके साथ ही इस भूमि पर डायरेक्ट जमाबंदी कायम किए जाने की बात भी सामने आ रही है।
मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि जमीन की मापी और राजस्व संबंधी प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारी के परिवार के नाम जमीन की खरीद और उसके बाद जमाबंदी कायम होने की पूरी प्रक्रिया क्या रही?
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और बिना जांच के किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। लेकिन यदि जमीन की खरीद, मापी की कार्रवाई और जमाबंदी कायम होने के बीच कोई कड़ी सामने आती है, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है।
जांच के दायरे में ये सवाल:
जमीन की मूल स्थिति क्या थी?
मापी किसके आदेश पर और कब कराई गई?
मापी रिपोर्ट किसने तैयार की?
जमीन की खरीद किन दस्तावेजों के आधार पर हुई?
डायरेक्ट जमाबंदी किस आदेश या दस्तावेज के आधार पर कायम की गई?
और जमाबंदी से संबंधित पूरी फाइल में किन अधिकारियों और कर्मचारियों के हस्ताक्षर हैं?
साथ ही यह भी जांच का विषय है कि क्या सरकारी पद का किसी स्तर पर अनुचित लाभ लिया गया या मापी के बदले किसी तरह के लाभ, उपहार या लेन-देन की बात सही है।
अब पूरे मामले में रजिस्ट्री दस्तावेज, मापी आदेश, मापी रिपोर्ट, जमाबंदी आदेश और राजस्व रिकॉर्ड की जांच से ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
बेंगाबाद अंचल से जुड़ा यह मामला अब एक अहम सवाल खड़ा कर रहा है—
मापी से जमाबंदी तक पहुंची इस पूरी प्रक्रिया में आखिर नियमों का पालन हुआ या नहीं?

