आहार की जमीन पर भू-माफियाओं की नजर, जल संचयन व सिंचाई का कार्य होंगे प्रभावित

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आहार की जमीन पर भू-माफियाओं की नजर, जल संचयन व सिंचाई का कार्य होंगे प्रभावित
-पलामू उपायुक्त से मिलकर आहर जमीन की बिक्री पर रोक लगाने का स्थानीय लोग करेंगे मांग

 

संवादाता विश्रामपुर (पलामू ), केंद्र व राज सरकार के द्वारा जल संचयन को लेकर आहार, पोखर, तालाब आदि का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। हर वर्ष मनरेगा सहित अलग-अलग एजेंसी के माध्यम करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। ताकि बरसाती पानी का संचयन हो व गांव का जल स्तर बना रहे। आहार, पोखर, तालाब आदि केवल जल संचयन का ही एक माध्यम नहीं बल्कि इनके पानी से किसानों के द्वारा बड़े पैमाने पर सिंचाई आदि का कार्य किया जाता है। वहीं इन दिनों के दिनों चाहे वह सरकारी हो या निजी आहर, पोखर, तालाब आदि पर भू माफिया की नजर लग गई है। वे बेखौफ आहर, पोखर, तालाब आदि को बेच रहे हैं। भू-माफिया ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी व निजी आहर, पोखर, तालाब को भर कर प्लॉटिंग कर बेच रहे हैं। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्र की भोले भाले लोगों को थोड़े रुपए का लालच देकर यह सब कराने में सफल हो रहे हैं।
ऐसा हीं विश्रामपुर प्रखंड के गुरहा गांव स्थित साया आहर क्या हो रहा है। यह आहार एनएच 39 बाईपास के किनारे लगभग पांच एकड़ रकबा में अवस्थित है। जिसका आधा हिस्सा गैरमजरुआ और रैयती है। गांव के लगभग 20 किसानों का आहर में जमीन है। भूमिया के द्वारा कुछ किसानों को लालच देकर लगभग तीन एकड़ जमीन की प्लाटिंग कर ली गई। इस आहार से लगभग 50 एकड़ भूमि सिंचित होता था। भू माफियाओं के द्वारा आहार की जमीन खरीद लिए जाने के कारण किसानों की सिंचाई कार्य प्रभावित होंगे।

ग्रामीण किसान सतेश सिंह उर्फ छोटन सिंह ने कहा कि इस पूरे मामले को लेकर गांव के लोगों के द्वारा आंदोलन का रुप तैयार किया जा रहा है। पलामू उपायुक्त को आवेदन देते हुए जमीन की बिक्री पर रोक लगाने की मांग किया जाएगा। इतना ही नहीं अगर जरूरत पड़ी तो इसके खिलाफ प्रखंड मुख्यालय पर आंदोलन भी किया जाएगा। आहर का एक बड़ा हिस्सा गैरमजरुआ है। जो स्थानीय लोगों के कब्जे में है। कुछ रैयती प्लोट है। ‌ माफिया रैयती प्लॉट की खरीददारी कर गैरमजरुआ जमीन पर नजर डालें हुए हैं। श्री सिंह ने कहा कि आहार की जमीन पर निर्माण कार्य या कंस्ट्रक्शन आदि का कार्य किए जाने से जल संचयन प्रभावित होगा। आहार के नीचे के जमीन पर सिंचाई नहीं हो पाएंगे। ऐसे में गांव अकाल-सुखाड़ की चपेट में आ जाएगा। आहार बिक्री पर रोक लगाने को ले गांव के मंगल सिंह, मनोज सिंह, रामाशीष सिंह, पारस सिंह, सुधीर सिंह, रणविजय सिंह, सतेश सिंह उर्फ छोटन सिंह, ललन सिंह आदि मुखर हैं। ये सभी पलामू उपायुक्त से मिलकर पूरी मामले अवगत कराते हुए जमीन बिक्री पर रोक लगाने की मांग करेंगे।

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