लापता मजदूरों के परिवारों की आवाज बना मिशन बदलाव, उपायुक्त को सौंपा मांग-पत्र
लापता मजदूरों के परिवारों की आवाज बनेगा मिशन बदलाव
उपायुक्त को सौंपा मांग-पत्र, खोज अभियान तेज करने और प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता देने की मांग
गुमला – जिले से लापता मजदूरों का मामला केवल सरकारी रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे उनके परिवारों की रोजी-रोटी, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य भी प्रभावित हो रहा है। लापता मजदूरों की तलाश और उनके परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग को लेकर मिशन बदलाव की जिला सचिव सय्यदा खातून, नगर अध्यक्ष ज्योति वर्मा, नगर सचिव ज्योति ग्लोरिया कुजूर, चंदन कुमार, देवनारायण एवं शुभम कुमार के नेतृत्व में उपायुक्त, गुमला को मांग-पत्र सौंपा गया।
मिशन बदलाव ने मांग की है कि जिले से लापता सभी मजदूरों की आधिकारिक सूची सार्वजनिक की जाए तथा प्रत्येक मामले में समयबद्ध तरीके से विशेष खोज अभियान चलाया जाए। संगठन ने कहा कि परिवारों को उनके मामले में चल रही जांच और कार्रवाई की नियमित रूप से लिखित जानकारी भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
मांग-पत्र में अन्य राज्यों की पुलिस एवं प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर अंतरराज्यीय स्तर पर तलाश अभियान चलाने की मांग की गई है। साथ ही प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक राहत, राशन एवं अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
संगठन ने लापता मजदूरों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने देने के लिए छात्रवृत्ति एवं शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराने, बुजुर्ग, बीमार, दिव्यांग और अन्य आश्रित सदस्यों को विशेष सहायता देने तथा पात्र परिवारों को विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने की मांग की है।
मिशन बदलाव ने प्रत्येक प्रभावित परिवार के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का भी आग्रह किया है, ताकि परिजनों को अपनी समस्या लेकर बार-बार विभिन्न कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। वहीं, किसी मजदूर की मृत्यु या गंभीर स्थिति की पुष्टि होने पर पात्र परिवार को नियमानुसार वैधानिक सहायता एवं मुआवजे की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने की मांग की गई है।
संगठन ने सभी मामलों की नियमित समीक्षा कर प्रगति रिपोर्ट तैयार करने तथा इसकी रिपोर्ट राज्य सरकार एवं श्रम मंत्री के समक्ष प्रस्तुत करने की मांग की है।
परिवारों को अकेला नहीं छोड़ने की मांग
मिशन बदलाव का कहना है कि लापता मजदूर की तलाश के साथ उसके परिवार की चिंता और उनकी मूलभूत जरूरतों का ध्यान रखना भी जरूरी है। कमाने वाले सदस्य के लापता होने से परिवार आर्थिक संकट, बच्चों की शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं को लेकर कठिन परिस्थितियों का सामना कर सकता है। ऐसे में प्रत्येक मामले में जवाबदेही तय करने, कार्रवाई की समयसीमा निर्धारित करने और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस पहल की जानी चाहिए।

