पलामू के प्रसिद्ध लोकगायक शिव कुमार चौधरी का निधन, लोकसंगीत जगत में शोक की लहर

लोकगायन का एक सुनहरा अध्याय हुआ समाप्त, नहीं रहे शिव कुमार चौधरी

पलामू-गढ़वा की मिट्टी की आवाज हमेशा के लिए खामोश, लोकगायक के निधन से भोजपुरी-लोक संगीत जगत में शोक की लहर

विश्रामपुर (पलामू)। पलामू-गढ़वा की धरती से निकलकर लोकगीतों को अपनी आवाज और अपनी अनूठी गायकी से पहचान दिलाने वाले प्रसिद्ध लोकगायक शिव कुमार चौधरी अब हमारे बीच नहीं रहे। शुक्रवार की देर रात इलाज के दौरान मेदिनीनगर में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही पलामू प्रमंडल सहित भोजपुरी और लोक संगीत से जुड़े कलाकारों, प्रशंसकों एवं शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई।
शिव कुमार चौधरी का जाना महज एक कलाकार का चले जाना नहीं है, बल्कि उस आवाज का खामोश हो जाना है, जिसने वर्षों तक गांव की चौपाल से लेकर बड़े सांस्कृतिक मंचों तक पलामू की मिट्टी, लोकजीवन और सामाजिक सरोकारों को सुर दिया। उनके गीतों में गांव की खुशबू थी, अपनी माटी से जुड़ाव था और लोक संस्कृति की सादगी थी। यही वजह रही कि वे धीरे-धीरे क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने में सफल हुए।
अचानक बिगड़ी तबीयत, इलाज के दौरान निधन
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार शुक्रवार शाम उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजन उन्हें तत्काल नौगढ़ा स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल ले गए। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए मेदिनीनगर रेफर कर दिया। मेदिनीनगर में इलाज के दौरान रात करीब 11 बजे उनका निधन हो गया।
निधन की खबर जैसे ही लोगों तक पहुंची, उनके चाहने वालों में मायूसी छा गई। जिन कार्यक्रमों में उनकी आवाज गूंजती थी, वहां अब उनकी स्मृतियां ही शेष रह गई हैं।
गीतों में बसती थी पलामू की माटी
विश्रामपुर प्रखंड के लालगढ़-पंजरी कला निवासी शिव कुमार चौधरी ने लोकगीतों को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बनाया, बल्कि अपनी गायकी के जरिए क्षेत्र की संस्कृति और परंपराओं को आवाज दी। उनके गीतों में पलामू के ग्रामीण जीवन की झलक मिलती थी। स्थानीय बोली, लोक परंपरा और आम लोगों की भावनाओं को उन्होंने अपने सुरों में स्थान दिया।
उनकी गायकी की सबसे बड़ी खासियत यही थी कि श्रोता उनके गीतों में अपने गांव, अपने समाज और अपनी मिट्टी की तस्वीर महसूस करते थे। यही अपनापन उन्हें आम लोगों के बीच लोकप्रिय बनाता गया।
एक आवाज, जिसे सुनने के लिए उमड़ती थी भीड़
शिव कुमार चौधरी का नाम क्षेत्रीय लोकगायन के उन कलाकारों में लिया जाता रहा, जिन्होंने अपनी पहचान किसी चमक-दमक के सहारे नहीं, बल्कि अपनी आवाज और लोक से जुड़ाव के दम पर बनाई। गांव-कस्बों के सांस्कृतिक आयोजनों में उनकी प्रस्तुति लोगों के लिए खास आकर्षण हुआ करती थी।
उनके जाने के बाद उनके गीत ही उनकी पहचान बनकर रह जाएंगे। मंच भले ही सूना हो जाए, लेकिन उनकी आवाज से जुड़ी यादें उन लोगों के बीच लंबे समय तक जीवित रहेंगी, जिन्होंने उन्हें सुना और करीब से जाना।
कलाकारों और जनप्रतिनिधियों ने जताया दुख
शिव कुमार चौधरी के निधन पर पलामू क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कलाकारों और गणमान्य लोगों ने शोक व्यक्त किया है। शोक जताने वालों में पलामू सांसद विष्णु दयाल राम, पूर्व मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी, विधायक नरेश प्रसाद सिंह, नगर परिषद अध्यक्ष गीता देवी, जिला पार्षद विजय रविदास, मुखिया धर्मेंद्र चौधरी, सांसद प्रतिनिधि अनुज पांडेय, भाजपा नेता किशोर पांडेय, कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष रविंद्र शुक्ला गुड्डू और भोजपुरी गायक विजय बावली सहित कई लोग शामिल हैं।
अब गीत रहेंगे, आवाज नहीं…
शिव कुमार चौधरी के निधन ने एक ऐसा खालीपन छोड़ दिया है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा। जिस कलाकार ने अपनी आवाज से लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाई, भावनाओं को शब्द दिए और अपनी माटी की संस्कृति को सुरों में पिरोया, आज वही आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई।
उनके गीतों की धुनें शायद आगे भी बजती रहेंगी। लोग उन्हें याद करते हुए उनके गीत सुनेंगे। किसी गांव के सांस्कृतिक मंच पर जब लोकगीत की आवाज उठेगी, तो कहीं न कहीं शिव कुमार चौधरी की याद जरूर आएगी।
कहते हैं कलाकार शरीर से विदा होता है, कला से नहीं।
शिव कुमार चौधरी भी अपनी आवाज, अपने गीतों और अपनी लोक-संस्कृति से जुड़ी यादों के माध्यम से लोगों के बीच हमेशा जीवित रहेंगे।
पलामू की धरती ने अपना एक सुर खो दिया है।
भोजपुरी-लोक संगीत ने अपना एक कलाकार खो दिया है।
और उनके चाहने वालों ने अपनी एक जानी-पहचानी आवाज हमेशा के लिए खो दी है।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिजनों एवं प्रशंसकों को यह अपूरणीय दुख सहने की शक्ति दें।