रंगेया पंचायत की मुखिया कुसुमी देवी का निर्वाचन रद्द, फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर चुनाव लड़ना पाया गया अवैध

रंगेया पंचायत की मुखिया कुसुमी देवी का निर्वाचन रद्द,कोर्ट ने फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर चुनाव लड़ने को माना अवैध

मनातू से अनिल कुमार की रिपोर्ट।

पलामू जिले अंतर्गत मनातू प्रखंड की रंगेया ग्राम पंचायत से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। न्यायालय ने सुनवाई के बाद रंगेया पंचायत की मुखिया कुसुमी देवी पति–अंतु सिंह, ग्राम– कुंडिलपुर, थाना– मनातु के 31 मई 2022 को घोषित निर्वाचन परिणाम को रद्द कर दिया गया है।मामला त्रिस्तरीय पंचायत आम निर्वाचन 2022 से जुड़ा हुआ है। आवेदिका शिकायतकर्ता मतिया देवी द्वारा कोर्ट में दाखिल कागजातों और दी गई।दलीलों के अनुसार, कुसुमी देवी ने गलत तथ्यों के आधार पर अनुसूचित जाति (SC) का प्रमाण पत्र प्राप्त किया था।अभिलेखों के अवलोकन से यह स्पष्ट हुआ कि विपक्षी कुसुमी देवी मूल रूप से झारखंड राज्य की अनुसूचित जाति की सदस्या नहीं हैं। इसके बावजूद उन्होंने ‘भोगता’ जाति को अनुसूचित जाति दर्शाते हुए और वास्तविक तथ्यों को छुपाते हुए घोषणा पत्र दाखिल किया था।इसी आधार पर उन्होंने रंगेया पंचायत से मुखिया पद के लिए नामांकन पत्र भरा था।सुनवाई और कोर्ट का फैसला अदालत में दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं की बहस सुनने और पत्रावली पर मौजूद सभी दस्तावेजों का सम्यक अवलोकन करने के बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि कुसुमी देवी इस चुनाव के लिए योग्य उम्मीदवार नहीं थीं और उनका नामांकन अवैध था।न्यायालय ने झारखंड पंचायती राज अधिनियम, 2001 की धारा 152 (1)(a) में निहित प्रावधानों का प्रयोग करते हुए दिनांक 31.05.2022 को कुसुमी देवी के पक्ष में घोषित निर्वाचन परिणाम को अवैध घोषित कर रद्द करने का आदेश जारी किया है।झारखंड पंचायती राज अधिनियम 2001 की धारा 152 (1)(a) के तहत फर्जी जाति और तथ्य छुपाने पर निर्वाचन रद्द कर दिया गया हैं।और आदेश की प्रतिलिपि प्रखंड विकास पदाधिकारी मनातू, जिला पंचायत राज पदाधिकारी पलामू को आवश्यक कार्यार्थ हेतू प्रेषित कर दिया।