25 साल बाद मिला वासेपुर हत्याकांड का दोषी शब्बीर, फिर हुआ फरार
25 साल बाद फिर सामने आया वासेपुर का खूनी चेहरा! डॉन फहीम की मां और मौसी का कातिल शब्बीर मिला
” पुलिस पहुंची तो फिर दे गया चकमा”
धनबाद : वासेपुर, एक ऐसा नाम, जहां कभी गोलियों की गूंज और गैंगवार की दहशत आम बात थी। ढाई दशक पहले इसी वासेपुर की सड़कों पर शुरू हुई खूनी दुश्मनी ने कई जिंदगियां निगल ली थीं। अब उसी खूनी इतिहास का एक भगोड़ा किरदार फिर चर्चा में है।डॉन फहीम खान की मां नजमा खातून और मौसी शहनाज खातून की दिनदहाड़े हत्या का दोषी शब्बीर आलम, जो वर्षों से कानून की आंखों में धूल झोंक रहा था, उसके छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में छिपे होने की सूचना पर धनबाद पुलिस ने दबिश दी। लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही शब्बीर फिर एक बार फिसल गया और अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया।
18 अक्टूबर 2001… जब गोलियों से दहल उठा था
18 अक्टूबर 2001 की वह सुबह आज भी धनबाद के लोगों को सिहरन देती है। फहीम खान की मां नजमा खातून और मौसी शहनाज खातून पुराना बाजार जा रही थीं। जैसे ही वे डाइमंड क्रॉसिंग के पास पहुंचीं, घात लगाए हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। कुछ ही सेकंड में सड़क खून से लाल हो गई और दोनों महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई।इस सनसनीखेज डबल मर्डर केस में शब्बीर आलम, उसके भाई शाहीद समेत सात लोगों को आरोपी बनाया गया था।
गिरफ्तार हुआ… फिर कोर्ट से भी फरार हो गया
हत्या के बाद शब्बीर वर्षों तक फरार रहा। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद वर्ष 2013 में उसे गिरफ्तार कर लिया, लेकिन अदालत में पेशी के दौरान वह पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। तभी से वह कानून के शिकंजे से बाहर है।हालांकि, वर्ष 2018 में धनबाद कोर्ट ने शब्बीर, उसके भाई शाहीद समेत सभी सात दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। लेकिन फैसला आने के बाद भी शब्बीर गिरफ्त से दूर ही रहा।
*छत्तीसगढ़ में बदली पहचान, पुलिस पहुंची तो मच गई हलचल
हाल ही में धनबाद पुलिस को इनपुट मिला कि शब्बीर छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित सरगुजा जिले के मोमिनपुर इलाके में नई पहचान के साथ रह रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम सादे कपड़ों में वहां पहुंची।दबिश के दौरान स्थानीय लोगों के विरोध का भी सामना करना पड़ा। इसी बीच पुलिस के आने की भनक शब्बीर को लग गई और वह फिर फरार हो गया। इसके बाद सरगुजा पुलिस ने पूरे इलाके में नाकाबंदी कर दी, लेकिन इस बार भी वह पुलिस के हाथ नहीं लगा।
*कोयला, स्क्रैप और रंगदारी… इसी से शुरू हुई थी खूनी जंग
फहीम खान और शब्बीर आलम की दुश्मनी किसी निजी विवाद की नहीं, बल्कि वर्चस्व की लड़ाई थी। कोयला, स्क्रैप, एजेंटी और रंगदारी के अवैध कारोबार पर कब्जे को लेकर दोनों गैंग आमने-सामने आ गए थे।यह संघर्ष इतना खूनी हुआ कि दोनों पक्षों के कई लोगों की जान चली गई। फहीम की मां और मौसी की हत्या उसी गैंगवार का सबसे चर्चित और सनसनीखेज अध्याय बन गई।
अब फिर शिकंजा कसने की तैयारी
पुलिस का दावा है कि शब्बीर की लोकेशन और नेटवर्क पर लगातार नजर रखी जा रही है। छत्तीसगढ़ से भागने के बाद उसकी तलाश और तेज कर दी गई है। 25 साल पुराने इस चर्चित हत्याकांड का यह भगोड़ा आरोपी कब तक पुलिस से बच पाएगा, इस पर सबकी नजर टिकी है।

