भरत तिवारी एनकाउंटर पर बड़ा सवाल! कांग्रेस नेता ने मांगी न्यायिक जांच

*न्याय केवल होना नहीं, दिखना भी चाहिए : अमित रंजन तिवारी:
गढ़वा :–किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में पुलिस न्यायालय का विकल्प नहीं हो सकती। यदि कानून लागू करने वाली संस्थाओं पर ही सवाल उठने लगें, तो आम जनता का विश्वास कमजोर होता है। युक्त बातें गढवा जिला कांग्रेस के महासचिव अमित रंजन तिवारी ने भरत तिवारी एंकाउंटर पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा, उन्होंने कहा की क्या बिहार पुलिस इतनी सक्षम नही थी की एक नागरिक जो आत्म समर्पण कर चुका को उसको गिरफ्तार कर सके और उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर सके|
एनडीए गठबंधन में बिहार पुलिस को कायर बना दिया अब वह बेकसुर पर भी वार कर अपना पीठ थापना चाहती है विभिन्न वीडियो में स्पष्ट दिखाई पड़ रहा है के भरत तिवारी ने अपना हथियार फेंक कर सैकड़ो पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया फिर इसके बाद पुलिस ने हत्या को अंजाम दिया भरत तिवारी इस लोकतंत्र के निष्पक्ष चेहरा था जिसे एनडीए की सरकार ने जिम्मेदारियां से भागने के लिए पुलिस से उसकी हत्या कराई। अंग्रेजी हुकूमत की तरह बिहार की भाजपा सरकार लोकतांत्रिक व्यस्था पर कडा प्रहार कर रही है|
भारत तिवारी की मौत केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था पर उठे गंभीर सवालों का विषय है। यदि कोई व्यक्ति आत्मसमर्पण कर चुका था और कानून की प्रक्रिया के अधीन था, तो उसकी सुरक्षा और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करना राज्य के पुलिस की जिम्मेदारी थी। आज समाज के हर वर्ग के लोग भारत तिवारी के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं, उनकी शव यात्रा मे हजारो की भीड़ रोती हुई शामिल रही जो यह दर्शाता है कि उन्होंने समाज के बीच अपनी अलग पहचान और विश्वास अर्जित किया था।
भरत तिवारी को उनके गांव और आसपास के लोग एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देखते थे, जो विस्थापितों और ग्रामीणों की समस्याओं को उठाता था।
भरत तिवारी के परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उन पर गोली चलाई गई। वहीं यह कहा जाना की उन्होंने पुलिस दल पर फायरिंग की, जिसके जवाब में कार्रवाई की गई। इन दोनों दावों के बीच सच्चाई क्या है, यह केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायिक जांच से ही सामने आ सकती है।
हम बिहार सरकार एवं संबंधित जांच एजेंसियों से मांग करते हैं कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय एवं समयबद्ध न्यायिक जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई देश के सामने आ सके और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई हो। लोकतंत्र में किसी भी व्यक्ति को न्यायिक प्रक्रिया से वंचित नहीं किया जा सकता। न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए जिससे लोकतंत्र पर आम जनता का विश्वास बना रहे|