पलामू के सतबरवा प्रखंड में विकास की बदहाली: सामाजिक कार्यकर्ता आशीष सिंहा ने CM हेमंत सोरेन को लिखा पत्र

पलामू के सतबरवा प्रखंड में विकास की बदहाली: सामाजिक कार्यकर्ता आशीष सिंहा ने CM हेमंत सोरेन को लिखा पत्र*

रांची/पलामू: झारखंड के पलामू जिले के सतबरवा प्रखंड में विकास कार्यों की रफ्तार लगभग थम सी गई है। बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी, महत्वपूर्ण पदों के लंबे समय से खाली पड़े रहने और पेयजल संकट को लेकर स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता आशीष कुमार सिन्हा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

आशीष कुमार सिन्हा ने अपने पत्र में सतबरवा प्रखंड को अत्यंत पिछड़ा क्षेत्र बताया है, जहां अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समुदायों की बहुलता है। उन्होंने लिखा कि प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और अंचलाधिकारी जैसे अहम पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। वर्तमान में प्रभारी बीडीओ के सहारे प्रशासनिक कामकाज चल रहा है, जिससे विकास योजनाओं पर गंभीर असर पड़ रहा है।

प्रमुख समस्याएं:

  • ग्रामीण स्तर पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव: आधे से अधिक गांवों में विकास कार्य शून्य के बराबर हैं।
  • पेयजल संकट: विभिन्न पंचायतों में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
  • मलवा डैम की दयनीय स्थिति: डैम की चैन संख्या 18 की 18 सतबद्धिनी (गेट) करीब छह महीने पहले टूट गई थीं, लेकिन अब तक उनकी मरम्मत नहीं हो सकी है। इससे आसपास के 105 गांवों के किसानों की सिंचाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। किसान खेती के लिए पानी का इंतजार कर रहे हैं।
  • समग्र विकास की धीमी गति: प्रखंड में विकास कार्यों की रफ्तार बेहद मंद है।

सामाजिक कार्यकर्ता आशीष कुमार सिन्हा ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि जनहित में इन समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए। उन्होंने प्रखंड में सभी महत्वपूर्ण पदों पर नियमित पदस्थापना करने और मलवा डैम की तुरंत मरम्मत सुनिश्चित करने की मांग की है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इन मुद्दों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो प्रखंड के पिछड़ेपन में और इजाफा होगा। इस मामले पर जिला प्रशासन और सरकार की क्या प्रतिक्रिया आती है, यह देखने वाली बात होगी।

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