कृषि विज्ञान केंद्र, गुमला का बड़ा कदम: उर्वरक अनुज्ञप्ति हेतु 15 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण, मृदा स्वास्थ्य और संतुलित पोषण पर विशेष फोकस
कृषि विज्ञान केंद्र, गुमला का बड़ा कदम: उर्वरक अनुज्ञप्ति हेतु 15 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण, मृदा स्वास्थ्य और संतुलित पोषण पर विशेष फोकस
गुमला – कृषि विज्ञान केंद्र, गुमला द्वारा विकास भारती, बिशुनपुर परिसर में उर्वरक अनुज्ञप्ति (उर्वरक लाइसेंस) प्राप्त करने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए 15 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। यह प्रशिक्षण 11 मई से 25 मई 2026 तक संचालित होगा। कार्यक्रम का मुख्य विषय समेकित पोषण तत्व प्रबंधन रखा गया है। इसमें जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए कृषि उद्यमी, उर्वरक विक्रेता और किसान उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि महेंद्र भगत ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी की सेहत और वैज्ञानिक खेती पद्धति ही बेहतर उत्पादन की कुंजी है। यदि किसान मिट्टी जांच के आधार पर पोषक तत्वों का प्रबंधन करें, तो खेती की लागत घटेगी और उपज में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। ऐसे प्रशिक्षण ग्रामीण युवाओं और कृषि व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए नए अवसर खोलते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों को निम्न विषयों पर व्यवहारिक और तकनीकी जानकारी दी—
समेकित पोषण तत्व प्रबंधन की अवधारणा और उपयोग
मिट्टी जांच के आधार पर उर्वरक प्रयोग की विधि
जैविक एवं रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग
फसलों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की महत्वपूर्ण भूमिका
उर्वरकों के सुरक्षित भंडारण के मानक तरीके
उर्वरक अनुज्ञप्ति से जुड़े नियम, प्रावधान और प्रक्रियाएं
कृषि क्षेत्र में अपनाई जा रही नवीन तकनीकें
वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की कि वे अंधाधुंध उर्वरक उपयोग से बचें और टिकाऊ खेती पद्धतियों को अपनाकर भूमि की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखें। प्रशिक्षण में बड़ी संख्या में किसान, कृषि उद्यमी और स्थानीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे,

