प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार बेरू गांव: 5 साल से प्लास्टिक के नीचे रहने को मजबूर एक परिवार
प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार बेरू गांव: 5 साल से प्लास्टिक के नीचे रहने को मजबूर एक परिवार
पांकी
सरकार की “सबको आवास” योजना के दावों की पोल पांकी प्रखंड के तेतराई पंचायत अंतर्गत बेरू गांव में खुलती नजर आ रही है। यहाँ एक परिवार पिछले पांच वर्षों से जर्जर हालत में, सिर पर प्लास्टिक तानकर रहने को मजबूर है, लेकिन प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।
गांव निवासी मोहम्मद एजाज ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि उनके परिवार में कुल आठ सदस्य हैं—तीन बेटे, तीन बेटियाँ और पति-पत्नी। पूरा परिवार एक ही जर्जर कच्चे मकान में रहने को विवश है, जिसकी छत इस कदर खराब हो चुकी है कि उसे प्लास्टिक से ढंकना पड़ा है।
मोहम्मद एजाज का आरोप है कि उन्होंने आवास के लिए कई बार गुहार लगाई है। उन्होंने कहा:
”पिछले 5 सालों से हम प्लास्टिक के नीचे रह रहे हैं। न मुखिया सुन रहे हैं, न पंचायत समिति और न ही वार्ड सदस्य। कोई भी हमारी सुध लेने वाला नहीं है।”
हैरानी की बात यह है कि प्रधानमंत्री आवास योजना या राज्य सरकार की अबुआ आवास योजना जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ अब तक इस जरूरतमंद परिवार तक नहीं पहुँचा है। गरीबी के कारण परिवार खुद नया मकान बनाने में असमर्थ है और अब उनकी उम्मीदें केवल सरकारी सहायता पर टिकी हैंl
गांव में इस परिवार की स्थिति को लेकर अन्य ग्रामीणों में भी रोष है। लोगों का कहना है कि अगर वास्तव में जरूरतमंदों को ही आवास नहीं मिलेगा, तो इन योजनाओं का क्या लाभ? मोहम्मद एजाज ने बताया कि उन्होंने हाल ही में किसी तरह कर्ज लेकर (समूह से पैसे लेकर) घर के लिए नींव (प्लिंथ) का काम शुरू किया है, ताकि शायद इसे देखकर प्रशासन की नींद टूटे।
अब देखना यह होगा कि खबर प्रकाशित होने के बाद क्या प्रखंड प्रशासन या जिला प्रशासन इस गरीब परिवार की सुध लेता है, या मोहम्मद एजाज और उनका परिवार आने वाली बारिश में इसी तरह प्लास्टिक के नीचे दिन काटने को मजबूर रहेगा।

