हाफ़िज़ सुलैमान अलैहिर्रहमा रहमत-ए-मुस्तफ़ा का हिस्सा हैं — नईम मिल्लत, मुबारकपुर

कजरू कलां, पांडू, पलामू में हाफ़िज़ सुलैमान अलैहिर्रहमा की याद में 5वाँ सालाना हाफ़िज़-ए-क़ुरआन कॉन्फ्रेंस कामयाबी के साथ संपन्न।
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दिनांक 23 मार्च 2026, बरोज सोमवार, ज़िला पलामू के कजरू कलां गाँव में हाफ़िज़ सुलैमान वेलफेयर सोसाइटी के ज़ेरे एहतिमाम, मुरीद ए मुफ़्ती-ए-आज़म हिंद, आमिल-ए-क़ुरआन व सुन्नत, शैदाए हुज़ूर हाफ़िज़ मिल्लत, मज़हर-ए-हुज़ूर खलील मिल्लत हाजी हाफ़िज़ मोहम्मद सुलैमान अलैहिर्रहमा की याद में निहायत तज़क व एहतेशाम के साथ 5वाँ सालाना हाफ़िज़-ए-क़ुरआन कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। जिसकी सरपरस्ती शहज़ादा-ए-हुज़ूर हाफ़िज़ मिल्लत, हुज़ूर अज़ीज़ मिल्लत ने फ़रमाई, जबकि सदर की कुर्सी पर शहज़ादा-ए-सिराजुल मशायख हज़रत हाजी डॉक्टर सैयद फ़ज़लुल हुदा साहब, सदर-ए-आला ऑल झारखंड मदरसा टीचर्स एसोसिएशन आखिर वक्त तक तशरीफ़ फरमा रहे, और निज़ामत की ज़िम्मेदारी तबीब आलम तबीब और हाफ़िज़ फ़ैज़ान रज़ा साहब लातेहार ने ब-तरीक़ा-ए-अहसन निभाई।
क़ुरआन मजीद की तिलावत से महफ़िल का आगाज़ किया गया। इसके बाद मोहम्मद आसिफ़ रज़ा सल्लमहू, क़ारी अब्दुल मुबीन नाज़िश रांचवी ने खूबसूरत नातिया अशआर पेश किए। इसके बाद मुफ़्ती दिलकश अत्तारी साहब ने इताअत-ए-वालेदैन के मौज़ू पर मुख़्तसर मगर दिलनशीं तक़रीर फ़रमाई, और मुफ़्ती मोहम्मद इलियास हुसैन अज़ीजी मुस्तफ़ाई साहब, रोहतास (बिहार) ने साहिब-ए-उर्स की हयात पर रौशनी डालते हुए कहा कि हाफ़िज़ सुलैमान अलैहिर्रहमा का किरदार इत्तेबा-ए-सुन्नत का बेहतरीन आईना दार था।
फिर नबीरा-ए-मज़हर-ए-हुज़ूर खलील मिल्लत, अज़ीज़म हाफ़िज़ मोहम्मद जौहर रज़ा सुलैमानी ने मनक़बत के ऐसे शानदार अशआर सुनाए, जिनसे तमाम अहले महफ़िल झूम उठे। हाफ़िज़ सुलैमान वेलफेयर सोसाइटी के फाउंडर अदीब-ए-शहीर हज़रत मौलाना मोहम्मद फ़ैज़ान रज़ा पलामवी ने मुख़्तसर वक़्त में दिलकश गुफ़्तगू और लाजवाब शायरी पेश की, जिससे महफ़िल में अलग समा बंध गया। इसके बाद नबीरा-ए-हुज़ूर हाफ़िज़ मिल्लत, हुज़ूर नईम मिल्लत ने अपने ख़ुसूसी ख़िताब में फ़रमाया कि हाफ़िज़ सुलेमान अलैहिर्रहमा हुज़ूर की रहमत का एक हिस्सा हैं। आखिर में शैख़-ए-तरीक़त हुज़ूर अज़ीज़ मिल्लत ने ईसाल-ए-सवाब से मुतअल्लिक़ मुबरहन व मुदल्लल गुफ़्तगू फ़रमाई। इसके बाद सलात व सलाम और हुज़ूर अज़ीज़ मिल्लत की रक़त-अंगेज़ दुआ के साथ महफ़िल का इख़्तिताम हुआ।
इस जलसे में राज्य और राज्य के बाहर के कई उलमा-ए-किराम, बिलख़ुसूस हज़रत हाफ़िज़ मोहम्मद शमीम साहब, मुफ़्ती सज्जाद आलम सक़ाफ़ी, मौलाना मक़बूल अहमद कलकतवी, मौलाना मशकूर, मौलाना अख़लाक़, मौलाना अकबर अली, क़ारी कमाल, मौलाना ज़फ़रुल्लाह, हाफ़िज़ ताजुद्दीन, हाफ़िज़ अब्दुल माजिद, हाफ़िज़ शमीम साहिबान के अलावा दर्जनों उलमा-ए-किराम की मुक़द्दस मौजूदगी रही।