बरवाडीह में अलविदा जुमा की नमाज, जमात में दिखी एकता और भाईचारा

बरवाडीह मस्जिदों में सामूहिक रूप से अलविदा का नमाज पढ़ने वाले लोगों के समूह ने ‘जमात’ की जमात में नमाज पढ़ने का मतलब है एकता।
इमाम के पीछे एक ही लय में झुकना और सजदा करना यह सिखाता है कि हम सब एक ही ईश्वर के बंदे हैं। नमाज के बाद लोग आपस में हाथ मिलाते हुए ।बरवाडीह की इन मस्जिदों में जमात न केवल इबादत का तरीका है, बल्कि यह समाज को जोड़ने और आपसी मोहब्बत बढ़ाने का एक मजबूत जरिया भी है।’जमात में ही बरकत नमाज मुकम्मल होने के बाद, सैकड़ों हाथ एक साथ दुआ के लिए उठे हुए हैं।सफें सीधी कर लें, दरमियान में जगह न छोड़ें। जमात की नमाज में अल्लाह की रहमत होती है।” जब सैकड़ों लोग एक साथ सजदे में जाते हैं, तो ऊंच-नीच और जात-पात का हर भेद मिट जाता है। यही बरवाडीह की ‘जमात’ की असली खूबसूरती है—जहाँ इबादत और इंसानियत एक ही कतार में खड़ी नजर आती है।”