नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय में डिग्री को लेकर हो रही मारामारी : YJKSF

नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय में डिग्री को लेकर हो रही मारामारी : YJKSF
नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय में डिग्री और प्रोविजनल को लेकर छात्र-छात्राओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। बताते चलें कि झारखंड सरकार द्वारा झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा और जेट की परीक्षा का विज्ञापन जारी किया गया है। इसमें आवेदन करने के लिए डिग्री और प्रोविजनल की आवश्यकता है। इसके लिए विद्यार्थियों की काफी भीड़ उमड़ पड़ी है। वही इसके विपरीत विश्वविद्यालय द्वारा एक ही काउंटर पर सिर्फ दो कर्मचारियों द्वारा यह कार्य करवाया जा रहा है। इसकी वजह से विद्यार्थियों में ऊहा पोह की स्थिति बनी हुई है।
छात्र संगठन वाईजेके स्टूडेंट्स फेडरेशन ने जब इसका कारण जानना चाहा तो बताया गया कि विश्वविद्यालय में कर्मचारियों की भारी कमी है, इसकी वजह से ऐसी स्थिति बनी हुई है। इस पर वाईजेके स्टूडेंट्स फेडरेशन के अधिकारियों ने कहा कि यह बहुत गलत हो रहा है छात्र- छात्राओं के साथ। अगर ऐसी भीड़ है तो विश्वविद्यालय को अधिक से अधिक कर्मचारियों को यहां पर काम पर लगाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। श्रवण सिंह ने कहा कि यह स्थिति बिल्कुल सही नहीं है, ऐसी भीड़ में विद्यार्थी मजबूर है खड़े रहने को। इसका निवारण विश्वविद्यालय प्रशासन को यथाशीघ्र करना चाहिए। विकाश यादव ने कहा कि झारखंड में कई वर्षों बाद जेट के लिए आवेदन मांगे गए हैं, इसलिए इतनी भीड़ है। जिला अध्यक्ष विपिन यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय में होने वाले दीक्षांत समारोह की वजह से ऐसी स्थिति बनी हुई है।जिला उपाध्यक्ष कृष्णा यादव ने कहा कि कर्मचारियों की कमी है यह गलती या जिम्मेदारी छात्रों की नहीं है, यह जिम्मेदारी विश्वविद्यालय की है, लेकिन विद्यार्थी भुक्तभोगी हैं। जिला सचिव मोहित साहू ने कहा कि हमारा संगठन ये प्रयत्न करेगा कि सभी विद्यार्थियों को डिग्री और प्रोविजनल मिल जाए।जीएलए कॉलेज अध्यक्ष प्रियरंजन ने कहा कि स्टाफ की संख्या और काउंटर बढ़ानी चाहिए ताकि कम से कम समय में छात्रों की परेशानियों को दूर किया जा सके। जिसपर विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों ने कहा कि हम पूरी कोशिश कर रहें हैं कि सभी विद्यार्थियों को डिग्री और प्रोविजनल उपलब्ध हो सके और कोई भी विद्यार्थी उपर्युक्त आवेदन से वंचित न रहें। उन्होंने आगे कहा कि इस समय हम अवकाश में भी काम कर रहें हैं ताकि किसी भी विद्यार्थी को परेशानी न हो।