स्वतंत्रता दिवस के दिन भी दिशोम गुरु शिबू सोरेन का श्राद्धकर्म की रस्म, सांस्कृतिक कार्यक्रम पर रोक लगाया जाय : अयुब खान
एक्स हैंडल पर पोस्ट कर माननीय राज्यपाल महोदय और आदर्नीय मुख्यमंत्री से स्वतंत्रता दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रम पर रोक लगाने की मांग।
स्वतंत्रता दिवस के दिन जन नेता शिबू सोरेन की श्रद्धाकर्म की रस्म निभाई जा रही हो दूसरी तरफ शोक और गम के मौके पर स्वतंत्रता दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन कर मनोरंजन और उत्सव कैसे मनाया जा सकता है
सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थगित कर दिशोम गुरु शिबू सोरेन को सम्मान किया जाना चाहिए
लाखों करोड़ों आदिवासियों के लिए किसी भगवान से कम नहीं हैं दिशोम गुरु शिबू सोरेन
चंदवा। किसान नेता सह कामता पंचायत समिति सदस्य अयुब खान ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि 15 अगस्त 2025 स्वतंत्रता दिवस के दिन दिशोम गुरु और राज्य के जन नायक शिबू सोरेन का श्राद्धकर्म की रस्म है, यह समय है उनके परिवार के साथ खड़े रहने की, और पुरा झारखंड वासी इनके निधन से मर्माहत हैं ऐसे में स्वतंत्रता दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रम पर रोक लगाए जाने की मांग माननीय राज्यपाल संतोष गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार के एक्स हैंडल पर पोस्ट कर उनसे की है, उन्होंने कहा कि जिसके कारण राज्य अलग हुआ, एक पहचान दी, राज्य की लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाया, झारखंड राज्य के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाया, जिन्होंने अपनी जिवन झारखंड की अस्मिता के लिए समर्पित कर दिया, उनकी तपस्या, संघर्ष और समर्पण ने झारखंड को नई दिशा दी,
लाखों करोड़ों आदिवासियों के लिए वे किसी भगवान से कम नहीं हैं आज उसकी रामगढ़ के नेमरा में परंपराओं के अनुरूप उसके शोकाकुल परिवार द्वारा विधि विधान से श्रद्धाकर्म की रस्म अदायगी की जा रही और स्वतंत्रता दिवस के दिन भी श्रद्धाकर्म की रस्म निभाई जा रही हो ऐसे में स्वतंत्रता दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रम कैसे आयोजित किया जा सकता है,
सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थगित कर दिशोम गुरु शिबू सोरेन को सम्मान किया जाना चाहिए।
दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन से राज्य ही नहीं देशभर में शोक की लहर है, साथ ही विधानसभा का चल रहे मानसून सत्र बीच में ही अनिश्चित काल के लिए स्थगित किया जा चुका है तो सांस्कृतिक कार्यक्रम पर भी रोक लगाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि नेमरा का दिशोम गुरु शिबू सोरेन सांसद रहे, मंत्री बने, राज्यसभा गए तीन बार के मुख्यमंत्री रहे शिबू सोरेन ने न केवल आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी, उन्होंने शोषकों के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा दी।
गरीबी और सामाजिक अन्याय के खिलाफ उनकी आवाज नेमरा की गलियों से निकलकर पूरे झारखंड में गूंजी, उन्होंने 1969 एवं 70 में जल जंगल बचाने और जमीन बेदखली के खिलाफ जनांदोलन शुरू किया।
झारखंड आंदोलन के क्रम में कई उतार चढ़ाव आए लेकिन ना टूटे, ना झुके,1980 के दशक में शिबू सोरेन ने बिनोद बिहारी महतो के साथ मिलकर अलग झारखंड राज्य के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ी।
दिशोम गुरु शिबू सोरेन को लोग ‘दिशोम गुरु इसलिए कहते हैं, क्योंकि उन्होंने आदिवासी समाज के साथ साथ गरीब शोषित कमजोर वर्गों को उनकी पहचान और राज्य को अधिकार दिलाने के लिए जीवनभर संघर्ष किया।
शिबू सोरेन की लड़ाई तब शुरू हुई जब अविभाजित बिहार यानी आज के झारखंड में महाजनी प्रथा अपने चरम पर थी और साल 1957 में उनके पिता की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद उन्होंने महजनी प्रथा के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया। वह नेमरा गांव के रहने वाले थे लेकिन उनकी मुहिम की गूंज कई प्रदेशों तक पहुंची।
शोषण के खिलाफ शिबू सोरेन ने अपने साथियों के साथ आंदोलन चलाया इस संघर्ष में महिलाएं हसिया लेकर वहीं पुरुष तीर कमान लेकर आते थे, उनके आंदोलन का मकसद था कि किसी भी तरह कमजोर वर्गों के शोषण को रोका जा सके और गरीब वर्ग पढ़ें लिखें और इतने काबिल बने कि खुद अपने हक की आवाज उठा सकें। इसके लिए उन्होंने रात में शिक्षा की व्यवस्था की। उन्होंने गांव पर आधारित अर्थव्यवस्था का मॉडल समझाया। इसी दौरान शिभू सोरेन को दिशोम गुरु की उपाधि से संबोधित किया जाने लगा।
शिबू सोरेन ने कमजोर तबके के लिए हक और उनके पिछ़ड़ेपन को दूर करने के लिए जो आवाज उठाई, उससे उनका कद इतना बड़ा हो गया कि हर घर में उन्हें लोग गुरु जी कहने लगे। इसके लिए उन्होंने तीन मुख्यबातों पर ध्यान दिया, पहला आदिवासियों की शिक्षा, शराब से दूरी और किसी भी सूदखोर के चक्कर में ना फंसना। उन्होंने इन तीनों बिंदुओं पर आदिवासियों को जागरूक करना शुरू किया। उन्होंने लोगों में ये डर भी बढ़ा दिया कि अगर किसी ने भी शराब पी तो उसे सजा दी जाएगी। ऐसा ही कुछ डर सूदखोरों से बचने के लिए भी दिखाया।
एक तरफ स्वतंत्रता दिवस के दिन जन नेता शिबू सोरेन की श्रद्धाकर्म की रस्म निभाई जा रही हो वहीं दूसरी तरफ शोक और गम के मौके पर स्वतंत्रता दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन कर मनोरंजन और उत्सव कैसे मनाई जा सकती है।
अयुब खान ने स्वतंत्रता दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रम पर रोक लगाने के लिए तत्काल पत्र जारी करने की आग्रह राज्यपाल और मुख्यमंत्री से की है।

