143 मीटर उपर से गिरता जलप्रपात की धारा की रौद्र रूप रोमांचित और डरावना लग रहा है

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बारिश के बाद दिखने लगा लोध फॉल का रौद्र रूप

महुआडांड़ में झारखंड का सबसे उंचा जलप्रपात लोध फॉल मानसून की पहली बारिश के बाद फॉल अपने रौद्र रूप में नज़र आने लगा है। जहां 143 मीटर उपर से गिरता जलप्रपात की धारा की रौद्र रूप रोमांचित और डरावना लग रहा है। लोध जलप्रपात पूरे साल अपने अंदर प्रकृति का सौंदर्य समेटे जंगल के बीच से जब झरने के रूप में चट्टान से लगकर नीचे गिरता है,तो नज़ारा मनोरम होता है।
सुरक्षा के इंतजाम

सुरक्षा को लेकर वन विभाग और पर्यटन विभाग के द्वारा व्यापक इंतजाम कर रखा है। इको विकास समिति टीम द्वारा सुरक्षा की पूरी कमान संभाली जाती है। तैराक टीम तैनात होते है, जो किसी परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार रहते है। इको विकास समिति के अध्यक्ष सुनील नगेसिया ने बताया कि लोध फॉल सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक खुला होता है,जबकि शाम 5 बजे से बंद कर दिया जाता है।

कैसे पहुंचे

रांची-नेतरहाट होते हुए एवं लातेहार से महुआडांड़ सड़क मार्ग के जरिए लोध फॉल पहुंच सकते है। महुआडांड़ से लोध फॉल तक बेहतरीन सड़क बनाये गए है। रांची से इसकी दूरी लगभग 217 किमी, घाघरा- बनारी के रास्ते से महुआडांड़ होते हुए पहुंचा जा सकता है। मेदिनीनगर-लातेहार से 117 किमी महुआडांड़ रास्ते पहुंच सकते है। लोध फॉल के अलावा प्रखंड में अन्य पहाड़ी झरना की खूबसूरती भी बारिश के बाद लोगों को लुभाने लगती है।

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