बालू से तेल निकाल रही है झारखंड सरकार ……चुन्नुकांत

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बालू से तेल निकाल रही है झारखंड सरकार ……चुन्नुकांत

चंदन पांडे,गिरिडीह

गिरिडीह झारखंड की जनता भले ही एक मुट्ठी बालू के लिए तरस रही है किंतु सरकार के संरक्षण में झारखंड के बालू से महाराष्ट्र और दूसरे अन्य बड़े प्रदेश में निर्माण कार्य तेजी से हो रहे हैं ।सरकार के इस सवैया से यहां लोगों में भारी रोष है ।भाजपा नेता चुन्नू कांत ने कहा कि सरकार की इस रवैया से लोगों में भारी रोष है ।भाजपा के इसके विरुद्ध जोरदार आंदोलन करेंगी । उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार अबुआ
आवास के नाम पर चाहे जितने भी तालियां पीट और पिटवा रही लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ और बयां करती है। बालू के अभाव में न केवल आवास बल्कि ऐसे कई सरकारी योजनाएं अधर में लटक गई हैं।उल्लेखनीय है कि जिले में कायदे से बालू घाटों की नीलामी नहीं हो पाई जिस कारण वैधानिक रूप से बालू के खरीदने का कोई व्यवस्था राज्य में नहीं है। ऊपर से एनजीटी और पर्यावरण मंत्रालय के द्वारा एनओसी नहीं दिए जाने के कारण जिन घाटों का नीलामी हुआ भी है वहां से बालु का उठाव नहीं किया जा सकता है ।
यक्ष प्रश्न यह है कि सरकार जब ऐसी योजनाओं की निर्माण की योजना बनाती है तो बालू वहां उन योजनाओं में कैसे मिलेगा इसकी कोई व्यवस्था नहीं करती। यही वजह है कि बालू के लिए लोगों को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। सूत्रों का कहना है कि एक तरफ बालू की किल्लत है तो दूसरी तरफ योजनाओं को पूरा करने का भारी दबाव भी रहता है। ऐसे में संवेदक और लाभुकों का बुरा हाल है। अगर वे बालू लेने का प्रयास करते हैं तो बालू की जुलाई में लगे वाहनों का बुरा हाल हो जाता है कार्रवाई के नाम पर न केवल पुलिस इनको पड़ती है बल्कि ऐसे वालों को जप्त कर लंबे समय तक रखती है जिस कारण से बाहर सब जाते हैं और उसमें वाहन मालिक की तो दुर्गति होती है कई बार कर्ज लेकर खरीदे गए वहां का किशत न चुका पाने के कारण बैंकों का भी हालत पतली हो जाती है ।वाहन मालिकों की स्थिति एक तरफ गड्ढा दूसरे तरफ खाई है ।अगर ढुलाई ना मिले तो उनके सामने बेरोजगारी की सामना करना पड़ता है ।और वहां वाले बालू उठाव की कोशिश करते हैं तो पुलिसिया कार्रवाई का कोप भाजन होना पड़ता है और कई बार उनकी गाड़ियां थाने में भी सड जाती है ।वहीं दूसरी ओर खनन विभाग और पुलिस के संरक्षण में चल रहे तस्करी वालों की चांदी है ।बालू धोने के लिए अगर नतीजा तो पुलिस कार्रवाई के नाम पर उनका करती है असम पुलिस वालों की चांदी है पुलिस और खनन विभाग के लोगों के मिले भगत से यहां के बालू दूसरे राज्य में जा रहे हैं जबकि यहां छोटे-छोटे योजनाओं के लिए लाभुकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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