भगवान को प्राप्त करने के लिए मनुष्य को अपनी जीभ , इंद्रियां,ईच्छा पर सयंम करना पड़ेगा तभी ईस्वर धन की प्राप्ति मनुष्य को हो सकती है

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भगवान को प्राप्त करने के लिए मनुष्य को अपनी जीभ , इंद्रियां,ईच्छा पर सयंम करना पड़ेगा तभी ईस्वर धन की प्राप्ति मनुष्य को हो सकती है

 

जानकारी अनुसार ,भिण्ड प्राचीन मंदिर श्री अर्धनारीश्वर महादेव मंदिर पर श्रीमद भागवत सप्ताह कथा का तृतीय दिवस पूर्ण आज कथा में आचार्य श्री आदित्यपुरी स्वामी महाराज ने बताया राजा पारीक्षत संसार मे सबसे अच्छे राजा थे जिन्होंने काफी राज पाट जीत कर भी अपने अंदर अभिमान की भावना को नही आने दिया ,ऐसे में राजा कभी भी भगवान की सेवा बिना अपना कोई कार्य नही करते थे ,एक दिन कलयुग ने राजा पारीक्षत की परीक्षा ली और उस परीक्षा के लिए राजा के सोने बाला मुकुट में कलयुग प्रवेश कर जाता है और राजा मुकुट को धारण करने के उपरांत श्री मतंग ऋषि के तप स्थान पर पहुँच कर उनके गले मे मृत सर्प डाल देता है ,इसी गलत बात का उनको दण्ड ऋषि के पुत्र के द्वारा दिया गया और उनको तक्षक सर्प काँटेगा इसका दिन भी निश्चित कर दिया अब राजा पारीक्षत को भी सोने का मुकुट उतारते ही सूचना मिली की सात दिन में आप की मृत्यु हो जाएगी ऐसे में राजा के सामने भय का कोई स्थान नही रहा और उन्होंने भगवान को प्राप्त करने के लिए श्री मद भागवत गीता का पाठ सुन्ना प्रारम्भ कर दिया ,
आचार्य श्री आदित्यपुरी महाराज ने बताया की मनुष्य को कभी भी भगवान की बनाई गई श्रष्टि में किसी ब्यक्ति, वस्तु ,स्थल आदि की आलोचना नही करनी चाहिए बल्कि मनुष्य को मनुष्य के काम आना चाहिए किसी ब्यक्ति का मज़ाक उड़ाना या फिर गुस्सा होकर विवाद करना इससे भगवान भी रूठ जाते है और तुम्हारे कर्मो अनुसार उसका फल मिलने लगता है ,ऐसे में प्रत्येक मनुष्य को भगवान के दर्शन करने के लिए सुख शांति की प्राप्ति क

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