8 साल से बंद पड़ा वाटर ट्रीटमेंट सिस्टम, 30 हजार लोगों को मिल रहा बिना फिल्टर पानी
शहर के महादेव तालाब के पास बने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से बगैर फिल्टर के ही 30 हजार की आबादी को पानी की आपूर्ति की जा रही है। प्लांट में लगी वाटर ट्रीटमेंट की ऑटोमेटिक मशीनें बीते 8 वर्षों से खराब पड़ी हुई हैं। इसके कारण पानी िफल्टर नहीं हो पा रहा है। सही समय पर मरम्मत नहीं होने के कारण प्लांट की ऑटोमेटिक मशीनें एक-एक कर खराब होती चली गईं। बावजूद आउटसोर्सिंग कंपनी शिवसागर कंस्ट्रक्शन व नगर निगम की ओर से कभी इस पूरे वाटर फिल्टर प्लांट को दुरुस्त करने की दिशा में ठोस पहल नहीं की गई और पेयजल के नाम पर माइंस के पानी की आपूर्ति की रही है।
इस वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण वर्ष 2009 में नगर विकास विभाग की एजेंसी जुडको ने किया था। इसकी लागत करीब 20 करोड़ रुपए थी। इसका उद्देश्य था अंडरग्राउंड कोयला खदानों के पानी शुद्ध कर शहर में सप्लाई करना। प्लांट की हालत वर्ष 2018 तक ठीक थी। उसके बाद विभागीय उदासीनता के कारण हालत खराब होती चली गई। फिलहाल मशीनों में जंग लग चुकी है, अधिकांश ऑटोमेटिक मशीनें बेकार हो चुकी हैं।

