उपायुक्त चतरा के निर्देश पर डीआरडीए निदेशक ने की जांच, योजनाओं में पारदर्शिता की उम्मीद

चतरा : पत्थलगड़ा प्रखंड अंतर्गत सिंघानी पंचायत में कार्यरत रोजगार सेवक टेकनारायण राम पर लगे अनियमितता, लाभुकों से दुर्व्यवहार और योजनाओं में अड़चन डालने संबंधी आरोपों की जांच मंगलवार को संपन्न हुई। यह जांच उपायुक्त कीर्तिश्री के निर्देश पर सत्ता की खोज (हिंदी दैनिक) अखबार में प्रकाशित समाचार के आलोक में कराई गई।
विदित हो कि ग्रामीणों द्वारा रोजगार सेवक पर योजनाओं के जियो टैगिंग, मजदूरी भुगतान और कार्य आवंटन में अनावश्यक अड़चन उत्पन्न करने तथा अनैतिक मांग करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिन्हें सत्ता की खोज अखबार ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस पर संज्ञान लेते हुए उपायुक्त ने जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) की निदेशक अलका कुमारी को जांच सौंपी थी।
मंगलवार को निदेशक अलका कुमारी ने पत्थलगड़ा प्रखंड कार्यालय पहुंचकर सर्वप्रथम प्रकाशित समाचार का हवाला देते हुए लाभुकों और ग्रामीणों से बिंदुवार जानकारी ली। इस दौरान कई लाभुकों ने रोजगार सेवक द्वारा मनरेगा कार्यों में चयन और भुगतान प्रक्रिया में की जा रही अनियमितताओं को सामने रखा। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि गृह पंचायत में तैनाती से व्यक्तिगत पक्षपात और द्वेष की स्थिति बन रही है, जिससे योजनाओं के कार्यान्वयन में अनावश्यक विलंब हो रहा है। ग्रामीणों ने रोजगार सेवक के शीघ्र स्थानांतरण की भी मांग की।
निदेशक ने योजनाओं से जुड़े अभिलेखों और प्रक्रियाओं की गंभीरता से जांच कर तथ्यों का सत्यापन किया। उन्होंने कहा कि समाचार में उठाए गए बिंदु सही पाए गए हैं और इस संबंध में तैयार जांच प्रतिवेदन शीघ्र ही उपायुक्त को प्रेषित किया जाएगा ताकि आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
इस कार्रवाई से लाभुकों और ग्रामीणों में यह विश्वास उत्पन्न हुआ है कि मनरेगा समेत अन्य योजनाओं के कार्यों में पारदर्शिता आएगी और पात्र लाभुकों को समय पर योजनाओं का लाभ प्राप्त होगा।

डीआरडीए निदेशक की पहल से योजनाओं में पारदर्शिता, ग्रामीणों को न्याय की आस

जांच के दौरान मुख्य रूप से जिला परिषद अध्यक्षा ममता कुमारी, प्रखंड प्रमुख मनीषा कुमारी, अंचल अधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारी उदल राम, जिला परिषद सदस्य रामसेवक भगत, सिंघानी पंचायत की मुखिया राधिका देवी, बरवाडीह पंचायत मुखिया संदीप सुमन, बीपीओ विनोद कुमार गुप्ता, संबंधित पंचायतों के पंचायत सचिव, रोजगार सेवक एवं कई ग्रामीण और लाभुक उपस्थित रहे।
ग्रामीणों का कहना है कि उपायुक्त के संवेदनशील रवैये और डीआरडीए निदेशक द्वारा तत्परता से की गई जांच के कारण मनरेगा और अन्य ग्रामीण योजनाओं के निष्पादन में आ रही बाधाओं के शीघ्र दूर होने की संभावना बढ़ गई है। साथ ही पारदर्शिता आने से पात्र लाभुकों को उनके अधिकारों का लाभ समयबद्ध रूप से मिलने की उम्मीद भी सशक्त हुई है।