सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में सप्तशक्ति संगम की जिला संयोजिका ने दिया संस्कार और अनुशासन का संदेश, भारत को जानो प्रतियोगिता के विजेता सम्मानित

सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, बरगंडा में सप्तशक्ति संगम की जिला संयोजिका का उद्बोधन और भारत को जानो प्रतियोगिता में विजेता भैया सम्मानित

*गिरिडीह,
सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, बरगंडा, गिरिडीह में आज प्रातःकालीन वंदना सभा में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व छात्रा, अभिभाविका व सप्तशक्ति संगम की जिला संयोजिका स्वाति सिन्हा ने शिरकत की।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं वरिष्ठ आचार्या पृथा दीदी द्वारा दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन से हुआ। सामूहिक वंदना के पश्चात प्रभारी प्रधानाचार्य अजित मिश्र ने मुख्य अतिथि का आत्मीय परिचय कराकर अभिनंदन किया। तत्पश्चात पृथा दीदी द्वारा उन्हें अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।अपने उद्बोधन में स्वाति सिन्हा ने कहा कि हमारे विद्यालय का नाम सरस्वती शिशु विद्या मंदिर है, अर्थात हम सभी माँ सरस्वती के शिशु हैं। जैसे हम मंदिर जाने पर मुख्य द्वार से ही भगवान को प्रणाम करते हैं, वैसे ही यहाँ विद्यालय के मुख्य द्वार से ही प्रणाम करने की संस्कृति हमारे संस्कारों को दर्शाती है।
उन्होंने भैया-बहनों को संबोधित करते हुए कहा कि अनुशासन का अर्थ केवल वंदना सभा या कक्षा में शांति से बैठना ही नहीं है। अनुशासन का वास्तविक अर्थ है – माता-पिता, आचार्य जी एवं दीदी जी द्वारा बताई गई अच्छी बातों को सुनना, समझना और अपने जीवन में आत्मसात करना। जब हम अनुशासन को जीवनशैली बनाते हैं, तभी हम एक अच्छे नागरिक और भारत माता के सच्चे सपूत बन सकते हैं।
वहीं विद्यालय के लिए गौरव का क्षण रहा, जब भारत विकास परिषद द्वारा बोकारो में आयोजित ‘भारत को जानो’ प्रांत स्तरीय प्रतियोगिता में कक्षा अष्टम के अनमोल मिश्र और रामप्रसाद ने द्वितीय स्थान प्राप्त कर विद्यालय का नाम रोशन किया।
इसअवसर पर प्रभारी प्रधानाचार्य अजित मिश्र जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि अनमोल और रामप्रसाद ने अपनी मेहनत, लगन और भारत के गौरवशाली इतिहास के प्रति जिज्ञासा से यह सिद्ध कर दिया है कि शिशु मंदिर के भैया केवल पुस्तकीय ज्ञान में ही नहीं, बल्कि राष्ट्र-बोध में भी अग्रणी हैं। यह सफलता सभी भैया-बहनों के लिए प्रेरणा है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास सच्चा हो, तो सफलता अवश्य मिलती है। उन्होंने दोनों भैया के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।तत्पश्चात आचार्य राजीव सिन्हा जी, रमेश आचार्य एवं दुलारचंद आचार्य द्वारा दोनों विजेता भैयाओं को प्रमाण-पत्र, ट्रॉफी एवं कलम देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में कक्षा षष्ठ से दशम तक के भैया व समस्त आचार्य दीदी उपस्थित रहे।

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