सरकोनी मध्य विद्यालय पहुंचे बीडीओ राकेश सहाय, बच्चों से पढ़वाई किताबें, मेहनत का दिया मंत्र
सरकोनी मध्य विद्यालय पहुंचे बीडीओ राकेश सहाय, बच्चों से पढ़वाई किताबें, बोले—मेहनत से तय होगा सफलता का रास्ता
कांडी (गढ़वा)। एसआईआर के तहत चल रही विसंगतियों एवं अन्य मामलों की सुनवाई के बीच कांडी के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) राकेश सहाय ने शुक्रवार को समय निकालकर सरकोनी मध्य विद्यालय का निरीक्षण किया और छात्र-छात्राओं से सीधे संवाद किया। अधिकारी के अचानक विद्यालय पहुंचने से बच्चों में उत्साह देखने को मिला। बीडीओ ने बच्चों को नियमित पढ़ाई के साथ खेलकूद में भी समय देने तथा भविष्य में ऊंचे पदों पर पहुंचकर देश और समाज की सेवा करने के लिए प्रेरित किया।
बीडीओ राकेश सहाय ने बच्चों से उनकी कक्षा की पाठ्य-पुस्तकों की रीडिंग कराकर शैक्षणिक स्तर को समझने का प्रयास किया। कई बच्चों ने धाराप्रवाह एवं बेहतर रीडिंग प्रस्तुत की, जिसे देखकर बीडीओ ने प्रसन्नता व्यक्त की और बच्चों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि पढ़ाई केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ज्ञान, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की मजबूत नींव है। बच्चों को अभी से नियमित अध्ययन की आदत विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि बड़ा लक्ष्य निर्धारित करें और उसे हासिल करने के लिए लगातार मेहनत करें। उन्होंने बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी सहित विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने और देश की सेवा करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने पढ़ाई के साथ खेलकूद को भी आवश्यक बताते हुए कहा कि खेल से शारीरिक स्वास्थ्य के साथ अनुशासन, टीम भावना और आत्मविश्वास का विकास होता है।
विद्यालय में उपस्थित शिक्षक से भी बीडीओ ने बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान देने तथा उनके साथ पूरी मेहनत से कार्य करने का अनुरोध किया। विद्यालय के एक अन्य पदस्थापित शिक्षक के गुरु गोष्ठी में प्रखंड मुख्यालय जाने की जानकारी दी गई।
इस दौरान बीडीओ ने मध्याह्न भोजन की स्थिति की भी जानकारी ली। विद्यालय में उपस्थित बच्चों ने मध्याह्न भोजन की स्थिति को संतोषजनक बताते हुए इसकी तारीफ की। बच्चों के साथ सीधे संवाद और उनकी पढ़ाई को परखने के बीडीओ के प्रयास से विद्यालय के छात्र-छात्राओं में खासा उत्साह नजर आया। अधिकारी का यह अंदाज चर्चा का विषय बना रहा कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने बच्चों के बीच पहुंचकर उनकी पढ़ाई, भविष्य और व्यक्तित्व विकास को प्राथमिकता दी।





