समदा आहर सड़क की मरम्मत शुरू, दीपक तिवारी की पहल से लोगों को राहत
बरसात में कीचड़, गड्ढों और बेबसी के बीच उम्मीद की राह
समदा आहर सड़क की मरम्मत के लिए आगे आए दीपक तिवारी
दुर्दशा से निजात पाने के लिए स्थानीय लोगों ने भी दिया साथ, सहयोगात्मक रवैया अपनाया
बरसात का मौसम जहां किसानों के लिए खुशहाली लेकर आता है, वहीं मेदिनीनगर नगर निगम के वार्ड संख्या-17 के हजारों लोगों के लिए यह मौसम वर्षों से कठिन परीक्षा बन गया है। रेड़मा से चियांकी को जोड़ने वाली समदा आहर–फनेश्वर बांध सड़क आज भी जर्जर हालत में है। गड्ढे, कीचड़ और फिसलन से भरी करीब तीन किलोमीटर लंबी सड़क पर हर दिन स्कूली बच्चे, मजदूर, कामगार, बुजुर्ग, महिलाएं और नौकरीपेशा लोग अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को विवश हैं। कभी कोई कीचड़ में गिरता है, तो किसी के कपड़े कीचड़ के छीटे से खराब हो जाता है। फनेश्वर बांध के तीन वर्ष पूर्व टूट जाने के बाद स्थिति और भी गंभीर हो गई है। रेड़मा और चियांकी के बीच की दूरी लगभग दस किलोमीटर तक बढ़ गई, जबकि पांच-छह गांवों के मजदूरों और आम नागरिकों का दैनिक आवागमन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ। वर्षों से उपेक्षित इस समस्या ने स्थानीय लोगों की परेशानी को लगातार बढ़ाया है। इस ओर किसी का ध्यान नहीं जाना भी परेशान करने वाला रहा।
जब व्यवस्था की उदासीनता से लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती रहीं, तब जनसेवा को अपना धर्म मानने वाले झामुमो नेता एवं समाजसेवी दीपक तिवारी एक बार फिर राहत का संकल्प लेकर और लोगों की उम्मीद बनकर सामने आए हैं। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआई) के परियोजना निदेशक से मुलाकात कर समदा आहर सड़क को तत्काल चलने योग्य बनाने का अनुरोध किया। इनके सकारात्मक पहल के बाद बड़े वाहनों के माध्यम से सड़क पर स्टोन चिप्स और आवश्यक सामग्री डलवाकर गड्ढों को भरने तथा कीचड़ व फिसलन से राहत दिलाने का कार्य प्रारंभ कराया गया है, जिससे स्थानीय लोगों को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
दीपक तिवारी ने बताया कि रांची रोड से समदा आहर, छेचानी टोला और फनेश्वर बांध होते हुए चियांकी तक जाने वाला यह मार्ग दर्जनों गांवों की जीवनरेखा है, लेकिन वर्षों से मरम्मत नहीं होने और बांध टूटने के बाद यह सड़क सुविधा के बजाय परेशानी का कारण बन गई। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करने के लिए लगातार प्रयास किए गए, लेकिन अब तक न तो बांध की मरम्मत हो सकी और न ही सड़क के स्थायी निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल हुई। इसके कारण सिंचाई एवं जलसंग्रह का महत्वपूर्ण स्रोत भी लगातार नीचे हो रहा है और लोगों में इसके लिए आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि सड़क की बदहाल स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ देर सड़क किनारे खड़े होकर देखा जाए तो लोग फिसलते, गिरते और किसी तरह संभलते हुए गुजरते नजर आते हैं। सबसे अधिक परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों, मजदूरों, महिलाओं और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। बरसात में यह मार्ग कई बार पूरी तरह जोखिम भरा हो जाता है।
उपायुक्त एवं महापौर से पहल करने की मांग
दीपक तिवारी ने कहा कि समदा आहर सड़क केवल एक सड़क नहीं, बल्कि हजारों लोगों के जीवन, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए इसका निर्माण और फनेश्वर बांध की मरम्मत स्थानीय जनहित की प्राथमिक आवश्यकता है।
उन्होंने पलामू उपायुक्त से फनेश्वर बांध की शीघ्र मरम्मत तथा समदा आहर सड़क के स्थायी निर्माण की मांग करते हुए कहा कि इससे हजारों लोगों को स्थायी राहत मिलेगी और शासन-प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा। साथ ही उन्होंने मेदिनीनगर की महापौर से भी इस दिशा में विशेष पहल करने का अनुरोध किया, ताकि नगर निगम में शामिल नए क्षेत्रों के साथ उपेक्षा की भावना समाप्त हो सके।
स्थानीय लोगों ने कहा दीपक ने उम्मीद की नई किरण जगाई है
स्थानीय लोगों का मानना है कि दीपक तिवारी ने सड़क की मरम्मत की शुरुआत ने वर्षों से निराश लोगों के बीच उम्मीद की नई किरण जगाई है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ें, तो यह मार्ग एक बार फिर हजारों लोगों की जीवनरेखा बन सकता है। यह पहल केवल सड़क की मरम्मत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि जब समाज की समस्याओं को अपना दायित्व मानकर संवेदनशील लोग आगे आते हैं, तो कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद की राह निकलती है। जनसेवा का यही भाव समाज को जोड़ता है और व्यवस्था के प्रति लोगों के विश्वास को मजबूत करता है।



