“सावन में पवित्र कांवड़ यात्रा: पोंची से बाबा बैद्यनाथ और बासुकीनाथ धाम तक आस्था का अद्वितीय संगम”
आज सतबरवा प्रखंड के पोंची शिव मंदिर से देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम और बासुकीनाथ धाम की कांवड़ यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का प्रस्थान एक महत्वपूर्ण और आध्यात्मिक अवसर है। सावन माह में यह यात्रा विशेष महत्व रखती है, क्योंकि इस दौरान लाखों भक्त बिहार के सुल्तानगंज में उत्तरवाहिनी गंगा से पवित्र जल लेकर लगभग 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर बाबा बैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक करते हैं। इसके बाद, बासुकीनाथ धाम में पूजा-अर्चना करने की परंपरा है, क्योंकि मान्यता है कि बाबा बैद्यनाथ की पूजा के बाद बासुकीनाथ के दर्शन के बिना यात्रा अधूरी मानी जाती है।पोंची, हलुमाड, नौरंगा आदि गांवों के श्रद्धालुओं ने “बोल-बम” के जयघोष के साथ इस पवित्र यात्रा की शुरुआत की, जो भगवान शिव के प्रति उनकी अटूट आस्था को दर्शाता है। आपने सभी को विदा कर क्षेत्र की खुशहाली की कामना की, जो इस अवसर को और भी विशेष बनाता है।
मौके पर समाजिक कार्यकर्ता आशिष कुमार सिन्हा और अन्य श्रद्धालु जैसे मंदीप यादव, छोटु साव, पिनटु साव, दिलबोध साव, विवेक कुमार साहू, रवि साहु, सोनु साव, रूपवनती देबी, शंकर साव, बलराम साव, दुर्योधन साव, गंगा साव, ममता देसी, सुनिता देवी, मुनिया देबी आदि की उपस्थिति इस आयोजन में सामुदायिक एकता को दर्शाती है।सावन माह में सुल्तानगंज से गंगा जल लेकर बाबा बैद्यनाथ को अर्पित करने की परंपरा पौराणिक कथाओं से जुड़ी है। कहा जाता है कि भगवान श्री राम ने सबसे पहले सुल्तानगंज से गंगा जल भरकर यह यात्रा की थी, और तब से यह परंपरा चली आ रही है। यह जल विशेष रूप से पवित्र माना जाता है, क्योंकि उत्तरवाहिनी गंगा का जल भगवान शिव को अति प्रिय है। कांवड़ यात्रा के दौरान भक्त कठिन तपस्या करते हैं, और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।

