पत्थलगड़ा में सोशल मीडिया पर आंदोलनकारी सूची को लेकर बवाल, चतरा में जांच की मांग हुई तेज

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग: सांसद प्रतिनिधि सुनील कुमार सिंह बोले— निष्पक्ष जांच से सामने आएगी सच्चाई, लेखराज टाइगर ने भी उठाई सत्यापन और कार्रवाई की मांग

चतरा (पत्थलगड़ा) : झारखंड आंदोलनकारी सूची को लेकर चतरा जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और अन्य माध्यमों पर आंदोलनकारी सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर लगातार बहस छिड़ी हुई है। लोग खुलकर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
बीते दिनों पत्थलगड़ा प्रखंड मुख्यालय में झामुमो की ओर से एक आवेदन सौंपकर आंदोलनकारी सूची में शामिल नामों की जांच कराने तथा पात्र और अपात्र व्यक्तियों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई थी। और यह मुद्दा सिर्फ पत्थलगड़ा ही नहीं जिलेभर में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।
सोशल मीडिया पर कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि किसी स्तर पर सूची तैयार करने में त्रुटि या अनियमितता हुई है तो उसकी पारदर्शी जांच होनी चाहिए। वहीं वास्तविक आंदोलनकारियों को उनका सम्मान और अधिकार मिलना चाहिए तथा यदि कोई पात्र व्यक्ति सूची से वंचित रह गया है तो उसे भी न्याय मिलना चाहिए।
इसी क्रम में चतरा सांसद के पत्थलगड़ा थाना विभाग के सांसद प्रतिनिधि सुनील कुमार सिंह ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारी सूची को लेकर सामने आ रही खबरें गंभीर हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से हस्तक्षेप कर जांच कराने का आग्रह करते हुए कहा कि सत्य सामने आना चाहिए, ताकि वास्तविक आंदोलनकारियों के साथ न्याय सुनिश्चित हो सके और यदि कहीं कोई अनियमितता हुई है तो उस पर नियमानुसार कार्रवाई हो।
वहीं झामुमो युवा नेता लेखराज टाइगर ने कहा कि आंदोलनकारी सूची में शामिल सभी नामों का निष्पक्ष सत्यापन होना चाहिए। जो लोग वास्तव में आंदोलन से जुड़े रहे हैं और किसी कारणवश सूची से बाहर रह गए हैं, उन्हें उचित स्थान मिलना चाहिए। साथ ही यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
मामले को लेकर जिले में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चाएं तेज हैं। आम लोगों का कहना है कि निष्पक्ष जांच से ही पूरे विवाद पर विराम लगेगा और वास्तविक आंदोलनकारियों को न्याय मिल सकेगा। अब लोगों की निगाहें सरकार और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।