​निंदा प्रस्ताव मानवता और न्याय की पुकार : सदाकत अंसारी

सांवादाता नवाज खान कुडू लोहरदगा

कुडू : कुडू ​लोहरदगा बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के सदस्य दीपू चंद्र दास की नृशंस हत्या और उसके पश्चात उनके शव को जलाए जाने की हृदयविदारक घटना ने पूरी मानवता को झकझोर कर रख दिया है यह कृत्य न केवल बर्बरता की पराकाष्ठा है बल्कि एक सभ्य समाज के माथे पर गहरा कलंक भी है
​मैं मोहम्मद सदाकत अंसारी उर्फ बाबाला इस जघन्य अपराध की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा करता हूँ किसी भी लोकतांत्रिक और सभ्य देश में धर्म जाति या समुदाय के नाम पर हिंसा का कोई स्थान नहीं हो सकता निर्दोषों का लहू बहाकर कोई भी विचारधारा खुद को महान सिद्ध नहीं कर सकती यह घटना दर्शाती है कि कट्टरपंथ किस कदर मानवीय संवेदनाओं को खत्म कर रहा है ​हमारी मांगें और अपील ​कठोर दण्ड मैं बांग्लादेश सरकार से पुरजोर मांग करता हूँ कि इस मामले की त्वरित जांच कर दोषियों को चिन्हित किया जाए और उन्हें ऐसी कड़ी सजा दी जाए जो मिसाल बन सके ​अल्पसंख्यकों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय समुदायों और मानवाधिकार संगठनों को इस पर कड़ा संज्ञान लेना चाहिए ताकि बांग्लादेश में रह रहे अल्पसंख्यकों के मन से भय को दूर किया जा सके और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो।
​शांति की अपील: हिंसा का जवाब हिंसा नहीं हो सकता। मानवता न्याय और आपसी सद्भाव की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है ​आज पूरा विश्व एक वैश्विक गांव है, जहाँ शांति और सह-अस्तित्व ही प्रगति का एकमात्र मार्ग है दीपू चंद्र दास के परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं न्याय मिलने तक हमारी आवाज़ बुलंद रहेगी
​इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं होता, और बेगुनाह का कत्ल पूरी इंसानियत का कत्ल है|