नीलाम्बर-पीताम्बर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कर्मा पर्व के अवसर पर घोषित अवकाश को रद्द करना न केवल विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों का अपमान है, बल्कि नीलांबर- पीतांबर और सम्पूर्ण झारखंड की लोक संस्कृति और परम्पराओं का भी घोर अनादर है

आजसू छात्र संघ द्वारा प्रेस कांफ्रेंस कर कर्मा पर्व पर नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय द्वारा छुट्टी रद्द करने का विरोध किया गया । छात्र नेता अभिषेक राज ने कहा कि कर्मा पर्व झारखंड की पहचान है। यह पर्व आदिवासी समाज की आस्था, परम्परा और एकजुटता का प्रतीक माना जाता है। सदियों से झारखंड की धरती पर यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता रहा है। ऐसे समय में जब पूरा राज्य इस पर्व में सहभागी होता है, विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अवकाश रद्द करना हमारे सांस्कृतिक अधिकारों पर कुठाराघात है।
यह निर्णय न केवल विश्वविद्यालय परिसर के विद्यार्थियों को आहत कर रहा है बल्कि सम्पूर्ण झारखंड की आदिवासी अस्मिता को चोट पहुँचा रहा है। जिस राज्य ने विश्वविद्यालय को अपनी धरती पर स्थापित किया, उसी राज्य की संस्कृति और परम्पराओं को दरकिनार कर यह निर्णय लिया जाना प्रशासन की असंवेदनशीलता और तानाशाही रवैये को दर्शाता है।
हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि कर्मा पर्व पर अवकाश केवल छात्रों , शिक्षकों और कर्मचारियों की सुविधा का विषय नहीं है, बल्कि यह झारखंड की सांस्कृतिक धरोहर और सामूहिक पहचान का प्रश्न है। विश्वविद्यालय प्रशासन को चाहिए कि वह राज्य की संस्कृति और परम्पराओं का सम्मान करे।
हम अपनी मांगों को विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने रखते हैं:
कर्मा पर्व पर घोषित अवकाश को तत्काल प्रभाव से पुनः बहाल किया जाए।
भविष्य में विश्वविद्यालय प्रशासन को झारखंड राज्य की सांस्कृतिक परम्पराओं का सम्मान करते हुए अवकाशों की घोषणा करनी चाहिए।
यदि हमारी इस मांग को अनसुना किया गया तो हम छात्र समुदाय आंदोलन करने को बाध्य होंगे। इसका सम्पूर्ण दायित्व विश्वविद्यालय प्रशासन का होगा।मौके पर राहुल तिर्की, मुकेश तिर्की, स्वास्तिक सिन्हा, बिपिन शुक्ला, आयुष राज, मनीष कुमार , आदि दर्जनों छात्र उपस्थित थे ।

— अभिषेक राज
छात्र नेता, नीलाम्बर-पीताम्बर विश्वविद्यालय