लक्ष्य निर्धारण और निरंतर अभ्यास ही सफलता की असली कुंजी: झारखंड लोक सेवा आयोग में सफल साकेत कुमार तिवारी
लक्ष्य निर्धारण और निरंतर अभ्यास ही सफलता की असली कुंजी: झारखंड लोक सेवा आयोग में सफल साकेत कुमार तिवारी
पढ़ने से नहीं प्रेक्टिस से परफेक्ट बनेंगे स्टूडेंट — क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी
मार्गदर्शन सत्र संतुलित अद्भुत और उद्देश्य पूर्ण भूमिका निभाता है—-साकेत कुमार तिवारी
जनगणना जागरुकता कार्य में सशक्त भूमिका निभा सकते हैं विद्यार्थी —-
मेहनत करने के लिए मोबाइल से दूरी जरूरी— साकेत कुमार
शिक्षार्थियों के लिए शिक्षा सबसे सशक्त माध्यम —अभिषेक कुमार तिवारी
सतबरवा, पलामू: शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने और युवाओं को प्रशासनिक सेवाओं के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से सर्वोदय प्लस टू उच्च विद्यालय सतबरवा विज्ञान शिक्षक अभिषेक कुमार तिवारी द्वारा सुनिश्चित शनिवार को एक विशेष ऑनलाइन मार्गदर्शन सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 124वां स्थान हासिल कर शिक्षा सेवा संवर्ग में चयनित हुए साकेत कुमार तिवारी जो वर्तमान में क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी सदर डाल्टनगंज में पदस्थापित है। उन्होंने अपने अनुभवों को साझा करते हुए छात्रों को सफलता के उन मूल मंत्रों से अवगत कराया जो एक प्रतियोगी छात्र के जीवन में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल अध्ययन मात्र से सफलता सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि निरंतर अभ्यास और व्यावहारिक दृष्टिकोण ही छात्र को उसकी मंजिल तक पहुँचाता है। इसका जीवंत उदाहरण बिना कोचिंग और ट्यूशन की सर्वोदय प्लस टू उच्च विद्यालय सतबरवा विज्ञान की छात्रा सना आफरीन ने झारखंड में सबसे ज्यादा अंक हासिल कर साबित किया है
सत्र के दौरान साकेत कुमार तिवारी ने छात्रों के साथ सीधा संवाद किया और उनके मन में उठने वाली शंकाओं का समाधान किया। जब छात्र ऋषभ कुमार ने पढ़ाई में एकाग्रता बनाए रखने की चुनौती पर सवाल पूछा, तो साकेत जी ने बहुत ही व्यावहारिक सुझाव देते हुए कहा कि एकाग्रता के लिए स्वयं को मानसिक रूप से सकारात्मक रखना अनिवार्य है। उन्होंने वर्तमान समय में सामाजिक संचार माध्यमों और विभिन्न मनोरंजन मंचों से दूरी बनाने की सलाह दी, जो छात्रों के कीमती समय और ध्यान को भटकाने का मुख्य कारण बनते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि घर के वातावरण में पढ़ाई के दौरान आने वाली दिक्कतों से घबराने के बजाय उनका दृढ़ता से सामना करना चाहिए, क्योंकि संघर्ष ही व्यक्तित्व को निखारता है।
कार्यक्रम में समूह भावना और नेतृत्व क्षमता के महत्व पर भी विस्तृत चर्चा की गई। वक्ता ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों के लिए छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें अपनी सृजनशीलता और व्यावहारिक प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करना होगा। उन्होंने नमन पाठक, ऋषभ कुमार, सुजीत कुमार, हिमांशु गुप्ता और पीयूष यादव जैसे मेधावी छात्रों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें संघ लोक सेवा आयोग जैसी कठिन परीक्षाओं के लिए अभी से आधार तैयार करने के लिए प्रेरित किया।
इस विशेष सत्र का संचालन और समन्वय सतीश कुमार दुबे जी और डी.के. शुक्ला जी के सानिध्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि शिक्षा वह शक्तिशाली अस्त्र है जिससे जीवन और समाज दोनों में बड़ा परिवर्तन संभव है। उपस्थित शिक्षकों और अभिभावकों ने इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे सत्रों से ग्रामीण क्षेत्र के प्रतिभावान छात्रों को सही दिशा मिलती है और उनके भीतर प्रशासनिक अधिकारी बनने का आत्मविश्वास जागृत होता है। यह कार्यक्रम न केवल सूचनात्मक रहा, बल्कि छात्रों के लिए ऊर्जा और प्रेरणा का एक नया स्रोत बनकर उभरा।


