लेदा और चचघरा में दीप महायज्ञ का आयोजन, गायत्री उपासना व नशामुक्ति का लिया संकल्प

गिरिडीह। अखिल विश्व गायत्री परिवार, गिरिडीह की इकाई ने लेदा और चचघरा (प्रखंड जमुआ) में दीप महायज्ञ का आयोजन कर जन-जन को गायत्री महामंत्र की उपासना और मंत्र लेखन अभियान से जोड़ने का निमंत्रण दिया। दोनों स्थानों पर उपस्थित लोगों ने गायत्री उपासना, मंत्र जप व मंत्र लेखन के प्रति संकल्प व्यक्त किए और सामुदायिक कल्याण के लिए प्रार्थना कीं।
ग्राम लेदा में आयोजित दीप महायज्ञ में उपस्थित बहनों ने नियमित गायत्री महामंत्र जप तथा मंत्र लेखन का संकल्प लिया। इस अवसर पर पुनम बरनवाल ने कहा कि गायत्री परिवार की संस्थापिका माता भगवती देवी शर्मा ने महिलाओं को गायत्री मंत्र की उपासना से जोड़ने का जो पुण्य व्यवहार शुरू किया था, उसके कारण आज न सिर्फ भारत बल्कि विश्व के करोड़ों महिला स्वयं और अपने परिवार को सन्मार्ग पर चलाने के लिए नियमित जप और लेखन से जुड़े हैं। कार्यक्रम में 108 दीपक प्रज्वलित कर गायत्री महामंत्र तथा महामृत्युंजय मंत्र से आहुतियाँ दी गईं और सर्वशांति तथा कल्याण की कामना की गई।
चचघरा में पंच कुंडीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया गया, जिसका संचालन जमुआ प्रखंड की बहनों ने किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ भुनेश्वर शास्त्री द्वारा मां गायत्री एवं गुरु की वंदना से हुआ। मुख्य प्रबंधक कामेश्वर सिंह ने उपस्थित लोगों से गायत्री उपासना करने के साथ-साथ अपने-अपने परिवारों को नशा मुक्त करने का आग्रह किया और आने वाले वर्षा ऋतु में प्रत्येक परिवार से पांच-पांच पौधारोपण करने का संकल्प लेने का निवेदन किया।
जिला युवा प्रभारी सुरेश यादव ने ग्रामीणों से कहा कि व्यसन पर खर्च होने वाली आय और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को देखते हुए व्यसन त्यागना आवश्यक है। उन्होंने गायत्री परिवार का नारा भी दोहराया — “व्यसन से बचाओ, सृजन में लगाओ”। जमुआ प्रखंड महिला समन्वयक संगीता साव ने भी उपस्थित बहनों से नियमित गायत्री मंत्र जप व मंत्र लेखन से जुड़ने का आग्रह किया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने अपने जीवन की बुरी आदतें छोड़ने तथा नियमित उपासना और मंत्र लेखन करने का संयुक्त संकल्प लिया।
कार्यक्रम के दौरान वेदमूर्ति तपोनिष्ठ द्वारा रचित प्रकाशित साहित्यकर लगभग तीन हजार रुपये की बिक्री हुई। अंत में मां गायत्री की आरती के साथ दोनों स्थानों पर गायत्री महायज्ञ का समापन हुआ।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य प्रबंधक कामेश्वर सिंह, नारायण महतो, किशुन महतो, डूमर महतो, राजेश कुमार राम, मनोहर राम, सहदेव प्रसाद कुशवाहा, भागीरथ प्रसाद सिंह, किशोरी शर्मा सहित स्थानीय ग्रामीणों का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ।