कारगिल विजय दिवस पर ‘काव्यानुरागी’ में गूंजे देशभक्ति के स्वर, वीर शहीदों को दी श्रद्धांजलि

कारगिल विजय दिवस पर ‘काव्यानुरागी’ में गूंजे देशभक्ति के स्वर

    कारगिल विजय दिवस के शुभ अवसर पर पं. हर्ष द्विवेदी कला मंच, नवादा, गढ़वा (झारखण्ड) द्वारा संचालित नवोदित रचनाकारों को समर्पित 'काव्यानुरागी' का आयोजन बंधन मैरिज हॉल, नवादा मोड़, गढ़वा में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ उपस्थित अतिथियों, साहित्यकारों एवं कला साधकों द्वारा अमर जवान ज्योति के समक्ष पुष्पार्चन एवं वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर किया गया।
विषय प्रवेश करते हुए काव्यानुरागी के आधार स्तंभ प्रमोद कुमार ने कहा कि “कारगिल विजय दिवस हमें देश के वीर सैनिकों के अदम्य साहस, बलिदान और राष्ट्रभक्ति की याद दिलाता है। साहित्य और कला के माध्यम से नई पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम का भाव जागृत करना हम सभी का दायित्व है। ‘काव्यानुरागी’ इसी उद्देश्य को आगे बढ़ा रहा है।”
नवोदित गायिका जासमिन खान ने देशभक्ति गीत “मेरा मुल्क मेरा देश मेरा ये वतन…” प्रस्तुत करते हुए कहा कि संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज को जोड़ने का माध्यम भी है। ऐसे आयोजनों से युवा प्रतिभाओं को अपनी कला प्रस्तुत करने का प्रेरक मंच मिलता है।
कवि धर्मेंद्र कुमार पुष्कर ने कहा, “कारगिल के वीरों का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। कविता समाज की चेतना को जागृत करने का सशक्त माध्यम है और हमें अपनी लेखनी को राष्ट्रहित के लिए समर्पित करना चाहिए।” राष्ट्र चेतना का भाव प्रकट करते हुए उन्होंने “ना मालूम कोई सुकुन से था, कोई गोलियाँ खा रहे थे, झुक न पाये यह तिरंगा, बातों से समझा रहे थे…” गीत प्रस्तुत किया।
कवि सौरभ कुमार तिवारी ने “बनाएँ विकसित अपना देश, हम सपूत भारत माँ के, सजाएँ तिरंगे का अपना भेष, हम सपूत भारत माँ के…” कविता प्रस्तुत करते हुए अपने वक्तव्य में कहा, “जब युवा पीढ़ी साहित्य और संस्कृति से जुड़ती है, तभी राष्ट्र का भविष्य मजबूत होता है। ऐसे आयोजन नवोदित रचनाकारों को नई दिशा और आत्मविश्वास प्रदान करते हैं।”
कवयित्री खुशबू उपाध्याय ने कहा, “वीरों का सम्मान केवल शब्दों से नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में उतारकर किया जा सकता है। काव्य समाज में संवेदनाओं और राष्ट्रीय चेतना का संचार करता है।” इन्होंने जीवन में असफलताओं से हार मानकर बैठ जाने वाले लोगों के लिए अपनी प्रेरणादायक कविता “कोशिशें की थीं हमने परंतु हो चुके थे असफल, सोचा एक बार करेंगे प्रयास शायद हो जाएँ सफल…” प्रस्तुत की।
कला साधिका संध्या सुमन ने कहा, “शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही है कि हम अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करें।”
कवि राजीव रंजन तिवारी ने अपनी रचना “प्रकृति जिंदाबाद, परिवर्तन जिंदाबाद, किसानी जिंदाबाद, जवानी जिंदाबाद…” प्रस्तुत करते हुए परिवर्तन को स्वीकार करने का संकल्प दुहराया।
इंदु भूषण मिश्र ने कहा, “कारगिल विजय दिवस केवल एक ऐतिहासिक दिवस नहीं, बल्कि राष्ट्र के गौरव, स्वाभिमान और एकता का प्रतीक है। हमें युवाओं में देशभक्ति और सांस्कृतिक मूल्यों का विकास करना चाहिए।” उन्होंने एक भावपूर्ण गीत “जीवन को मैंने सौंप दिया भगवान तुम्हारे हाथों में…” प्रस्तुत कर अपनी भावना प्रकट की।
लोक गायक अरविंद कुमार तिवारी ने कहा, “लोकगीत हमारी मिट्टी की पहचान हैं। जब उनमें देशभक्ति का स्वर जुड़ता है तो वे जन-जन के हृदय तक पहुँचकर राष्ट्रप्रेम की भावना को और सशक्त बनाते हैं।” इन्होंने कारगिल के वीर शहीदों की स्मृति में एक भोजपुरी रचना “जा हो जवनवा रखिह भारत के शनवा, दुआ दिल से बा,
त नेहिया देहिया से नईखे, कारगिल से बा…”
कार्यक्रम का सफल संचालन पं. हर्ष द्विवेदी कला मंच के निदेशक नीरज श्रीधर ‘स्वर्गीय’ ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “‘काव्यानुरागी’ का उद्देश्य केवल काव्यपाठ कराना नहीं, बल्कि नवोदित रचनाकारों को एक सम्मानजनक मंच उपलब्ध कराना है, जहाँ उनकी प्रतिभा समाज के सामने आए और साहित्य एवं संस्कृति की नई पीढ़ी तैयार हो।”
अंत में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए राम अवतार चंद्रवंशी ने कहा कि, “सभी प्रतिभागियों, अतिथियों एवं कला प्रेमियों की सक्रिय सहभागिता से यह आयोजन सफल हुआ। भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से साहित्य, कला और राष्ट्रभक्ति की भावना को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा।”
इस अवसर पर अधिवक्ता अमोद कुमार सिन्हा, श्रीपति धिरकार सहित अनेक कला साधक, साहित्य प्रेमी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।