कारगिल विजय देशवासियों के लिए मलय समीर है – अविनाश देव
कारगिल विजय देशवासियों के लिए मलय समीर है – अविनाश देव
मेदिनीनगर – भारत का पेटीशन एक त्रासदी था तब से पड़ोसी मुल्क भारत के जन्नत कश्मीर पर कुदृष्टि लगाए जी रहा है और मौका मिलते गिद्ध की तरह नोचना चाहता है। ऐसा ही घटना आज के पच्चीस साल पहले घटा जिसे कारगिल युद्ध के नाम से जाना जाता है। आज ही के दिन 26 जुलाई 99 को भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस शौर्य पराक्रम एवं कुर्बानी के बदौलत कारगिल फतह किया गया था। अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद पलामू द्वारा कारगिल विजय दिवस समारोह स्थानीय नगरभवन में आयोजित किया गया। बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल हुए। सेना के शहीद जवानों के तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित किए,परिषद के अध्यक्ष अंगवस्त्र पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किए। कार्यक्रम को संबोधित करते हमने कहा सीमा पर सैनिकों के रतजगा से हम घर में गहरी नींद लेते हैं नहीं तो रात के नींद और दिन के चैन गायब रहता। कारगिल का युद्ध हमने देखा नहीं सिर्फ सुना है जिससे रोंगट खड़ा हो जाता है। जो शहादत देकर भारत को सिरमौर बनाया जो लड़ कर सुरक्षित घर लौटे उससे हम रोमांटिक होते हैं। ऐसे शौर्य को सरकार पाठ्यक्रम में लागू करे। आने वाली नस्ले अपनी फड़फड़ाती भुजा को उफनती लहू को अपने मुल्क के हिफाजत सर्वस्व न्योछावर कर सके। हम भारतीय कारगिल युद्ध को अब सिर्फ एहसास कर सकते हैं। इसलिए हमने कहा कारगिल विजय देशवासियों के लिए अब मलय समीर है जिसे घ्राणशक्ति से महसूस कर सकते है। सभी बीर शहीदों को क्रांतिकारी इस्तेकबाल।

