कांडी प्रखंड मुख्यालय में एक सरकारी प्याऊ तक नहीं, गर्मी में लोग परेशान

जमीन के अभाव में प्रखंड मुख्यालय में एक सरकारी प्याऊ तक नहीं

जबकि 6 – 7 एकड़ सरकारी जमीन निजी कब्जे में

फोटो : प्याऊ का फाइल फोटो।

कांडी : भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान ने आम लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। सुबह आठ बजे के बाद ही धूप आग उगलने लगती है और नौ बजे के बाद घर से बाहर निकलना लोगों के लिए चुनौती बन जाता है। इसके बावजूद कृषि प्रधान क्षेत्र होने के कारण किसानों, मजदूरों और आम ग्रामीणों को अपनी जरूरतों के लिए दोपहर की तपती धूप में भी बाहर निकलना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी कांडी प्रखंड मुख्यालय पहुंचने वाले हजारों लोगों को झेलनी पड़ रही है, जहां बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव देखने को मिल रहा है।
कांडी प्रखंड मुख्यालय में प्रतिदिन करीब आठ से दस हजार लोग विभिन्न कार्यों से पहुंचते हैं। इनमें प्रखंड कार्यालय, अंचल कार्यालय, थाना, अस्पताल, बैंक, स्कूल-कॉलेज, पशु अस्पताल, जेएसएलपीएस कार्यालय, आईसीडीएस परियोजना कार्यालय, बस स्टैंड और टेंपो स्टैंड आने वाले लोग शामिल हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि पूरे प्रखंड मुख्यालय में एक भी सरकारी प्याऊ नहीं है, जहां लोग मुफ्त में पीने का पानी प्राप्त कर सकें। भीषण गर्मी में लोग पानी के लिए दुकानों पर निर्भर हैं और उन्हें पानी पीने के लिए भी पैसे खर्च करने पड़ते हैं।
स्थिति और भी गंभीर तब हो जाती है जब सार्वजनिक शौचालय, मूत्रालय और स्नानागार जैसी मूलभूत सुविधाओं की बात आती है। हजारों लोगों की भीड़ वाले इस प्रखंड मुख्यालय में एक भी सार्वजनिक शौचालय नहीं है। पुरुष तो किसी तरह इधर-उधर जाकर अपनी जरूरत पूरी कर लेते हैं, लेकिन महिलाओं को भारी परेशानी और शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है। पंचायतों और सरकारी योजनाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के कारण प्रतिदिन बड़ी संख्या में महिलाएं प्रखंड मुख्यालय आती हैं, लेकिन उनके लिए कोई न्यूनतम व्यवस्था तक नहीं की गई है।
सबसे गंभीर सवाल यह उठता है कि आखिर इन सुविधाओं के निर्माण में बाधा क्या है? स्थानीय लोगों का कहना है कि कांडी में सरकारी जमीन की कोई कमी नहीं है, लेकिन वर्षों से अतिक्रमण और प्रशासनिक उदासीनता के कारण सार्वजनिक उपयोग की जमीनें धीरे-धीरे कब्जे में चली गईं। प्रखंड कार्यालय के सामने जिला परिषद की 19 डिसमिल, छठ घाट के नाम पर 10 डिसमिल तथा एक निजी शैक्षणिक संस्थान में 19 डिसमिल सरकारी जमीन दबाए जाने की चर्चा आम है। इसके अलावा पंचायत भवन के निकट भी बड़ी मात्रा में सरकारी जमीन पर कब्जा कर मकान बना लिए गए हैं।
शिक्षा संस्थानों की जमीन भी अतिक्रमण से अछूती नहीं रही। राजकीयकृत जमा दो उच्च विद्यालय की लगभग पांच एकड़ जमीन पर वर्षों से दूसरे लोगों का कब्जा बताया जाता है। स्कूल प्रबंधन कई बार जमीन की मापी कराने के लिए आवेदन दे चुका है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। हाल ही में मिडिल स्कूल की बाउंड्री निर्माण के दौरान भी पूरी जमीन को सुरक्षित नहीं किया गया, जिसके बाद खाली बची जमीन पर गरीब लोगों ने रोजी-रोटी चलाने के लिए गुमटी रख ली। अब उन्हीं गरीबों को हटाने के लिए नोटिस थमाया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई हमेशा कमजोर और गरीब लोगों पर ही दिखाई देती है, जबकि वर्षों से बाजार की करीब चार एकड़ 84 डिसमिल सरकारी जमीन पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण बना हुआ है। अंचल कार्यालय से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायतें पहुंचीं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई आज तक नहीं हुई। दूसरी ओर, कुछ फीट जमीन पर गुमटी लगाने वाले गरीबों को तुरंत हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है।
विडंबना यह है कि जमीन के अभाव का हवाला देकर आज तक कांडी में सरकारी प्याऊ, सार्वजनिक शौचालय, बस स्टैंड और टेंपो स्टैंड का निर्माण नहीं हो सका। यहां तक कि प्रखंड कार्यालय को भी मुख्यालय से पांच किलोमीटर दूर निर्जन क्षेत्र में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। लोगों का कहना है कि यदि सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए तो कांडी में बुनियादी सुविधाओं का विकास आसानी से संभव है।
क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि सरकारी जमीन की निष्पक्ष जांच कर अतिक्रमण हटाया जाए तथा आम जनता की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्याऊ, शौचालय, बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं का शीघ्र निर्माण कराया जाए।