हुसैनाबाद : कथित फ़र्जी चिकित्सक के इलाज से बालक की मौत, प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल

हुसैनाबाद : कथित फ़र्जी चिकित्सक के इलाज से बालक की मौत, प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल

हुसैनाबाद। हुसैनाबाद के हरही नदी के समीप स्थित ख़ुशबू क्लीनिक में ग़लत इलाज के कारण पचंबा गाँव निवासी छह वर्षीय बालक की मौत हो गई। मृतक के पिता ने आरोप लगाया कि कथित चिकित्सक डॉ. पंकज कुमार की लापरवाही से बच्चे ने दम तोड़ा। घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने हंगामा किया, जिसके चलते क्लिनिक को बंद कर आरोपी चिकित्सक फ़रार हो गया।

इस संदर्भ में चौक-चौराहों पर बातचीत के क्रम में आम लोगों का कहना है कि हुसैनाबाद व आस-पास झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार है। कुछ माह पूर्व प्रशासन ने जेपी चौक स्थित डॉ. अखिलेश पासवान की क्लीनिक को सील किया था, लेकिन आज भी वहाँ इलाज जारी है। इसी तरह अनुमंडल गेट के सामने सीमा मिश्रा की क्लीनिक, रेलवे क्रॉसिंग के पास ममता मिश्रा की क्लीनिक तथा डॉ. संतोष कुमार की क्लीनिक को सील करने के बाद भी खुलेआम संचालित किया जा रहा है, वहीं स्टेशन रोड स्थित लीलावती हॉस्पिटल एवं जपला-नबीनगर रोड पर राहत क्लीनिक जैसे कई प्रतिष्ठान फ़र्जी चिकित्सकों के भरोसे चल रहे हैं, जहाँ बोर्ड पर एमबीबीएस डॉक्टरों के नाम तो लिखे रहते हैं, लेकिन इलाज झोलाछाप डॉक्टर ही करते हैं।

आपसी बातचीत के क्रम में लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि राज अल्ट्रासाउंड संचालक सरकारी अस्पताल के चिकित्सक की मिलीभगत से जाँच घर एवं मेडिकल स्टोर चला रहे हैं। मरीज़ों को सरकारी अस्पताल के पास महँगे निजी जाँच केंद्रों में भेजा जाता है, वहीं उन्हें महँगी दवाइयाँ दी जाती हैं, जो कहीं-न-कहीं चिकित्सा माफ़िया के सक्रिय नेटवर्क को उजागर करता है।

इस पूरे प्रकरण ने न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की ख़ामियों को उजागर किया है, बल्कि प्रशासन की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। लोगों ने पलामू उपायुक्त समीरा एस जी से मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जाँच की माँग की है। साथ ही, यह सवाल उठाया है कि सील की गई क्लीनिकें दोबारा कैसे खुलीं और इसके पीछे किसकी मिलीभगत है…? प्रशासन की अगली कार्रवाई पर अब सबकी निग़ाहें टिकी हैं।

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