हिंदी दिवस पर फिल्म लेखिका-निर्देशक स्वर्णिमा सिंह का स्वागत
हिंदी दिवस के अवसर पर लेखक, निर्देशक स्वर्णिमा सिंह का स्वागत किया गया
मासूम आर्ट ग्रुप ने किया स्वागत
पलामू की चैनपुर के लादी गढ़
राजपरिवार की स्वर्णिमा सिंह जो अब हिंदी फिल्मों की पटकथा लेखक, निर्देशक, निर्माता है का सोमवार को स्वागत किया गया। हिंदी दिवस के अवसर पर की देर शाम बंगाली पुस्तकालय में मासूम आर्ट ग्रुप ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर मौजूद लादी गढ़ की बहु मैना सिंह राठौर का भी स्वागत किया गया। स्वर्णिमा सिंह ने कहा कि अभी के समय में हिंदी फिल्म निर्माण और उससे जुड़ी संभावनाएं काफी बढ़ गई है। हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारी हिंदी भाषा है जो मीठी होने के साथ साथ ताकतवर भी है। इस समय फिल्म निर्माण एक ऐसी विधा है जिसमें कौन, कब, कहां, कैसे सफल या असफल होगा यह कहा नहीं जा सकता। स्वर्णिमा ने कहा कि फिल्म इस समय नएपन के दौर से गुजर रही है , कहानी, कलाकार, जगह, बनाने के तरीके सब तेजी से नयापन तलाश रहा है। वो नयापन अब बड़े शहरों में नहीं छोटे शहरों में है। इसलिए छोटे शहरों के कलाकार चाहे वो लेखन, अभिनय, निर्माण किसी भी क्षेत्र से हो तैयार रहे कभी भी उनके सामने संभावना के द्वार खुल सकते है। सिर्फ उन्हें बिना निराश हुए दरवाजा खटखटाते रहना है। कार्यकम को संबोधित करते हुए मासूम के सचिव सैकत चट्टोपाध्याय ने कहा कि स्वर्णिमा सिंह पलामू में फिल्म निर्माण करना चाहती है यह बहुत अच्छी बात है क्यों कि उन्होंने विदेशों में रहते और बड़ी संभावनाओं के होने के बाद भी अपनी मिट्टी को नहीं भुला और यहां काम करने को सोच रही है। उन्होंने कहा कि पलामू में मासूम के अलावा भी कई संस्थाएं है जो फिल्म निर्माण कर रही है, सभी से स्वर्णिमा को सहयोग मिलेगा। स्वर्णिमा का स्वागत करने वालों में अमर कुमार भांजा, अविनाश तिवारी, सुमित वर्मन , उज्ज्वल सिन्हा, संजीव कुमार राम, राज प्रतीक पाल, आदर्श पांडेय, कनक लता तिर्की, परिणीता पाल शामिल थी। कार्यक्रम को सफल बनाने में संगम प्रकाश, गिरेंद्र यादव, मो नसीम, शहजादा तालिब, अदनान कासिफ, आनंद कुमार गुप्ता आदि का सराहनीय योगदान रहा।
कौन है स्वर्णिमा सिंह
स्वर्णिमा सिंह पलामू की चैनपुर की लादी गढ़ राजपरिवार से ताल्लुक रखती है। संत मरियम स्कूल व डीएवी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद उन्होंने रांची व
दिल्ली में उच्च शिक्षा ग्रहण की। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़ी कंपनियों में उच्च पदों पर रही। अस्ट्रेलिया में सात साल तक नौकरी करने के दौरान उन्हें लेखन की इच्छा हुई तो इसकी विधिवत ट्रेनिंग की और लिखना शुरू किया। भारत – ऑस्ट्रेलिया के संयुक्त तत्वाधान में बनी फिल्म हिंदी – बिंदी का लेखक दल का हिस्सा रही। इसके अलावा फिरनी, अगर तुम साथ हो जैसी पटकथा लिखी। स्वर्णिमा की शॉर्ट फिल्म की पटकथा को अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। फिर उन्होंने अपनी फिल्म निर्माण कंपनी खोली जिसका नाम नवाबी डिंगो रखा। इसके बैनर तले एक लघु फिल्म का निर्माण कर चुकी है। जिसकी शूटिंग ऑस्ट्रेलिया में हुई। अब स्वर्णिमा अपनी मिट्टी पलामू में फिल्म शूट करना चाहती है जिसकी कहानी भी यहीं की होगी। इसकी तैयारी के सिलसिले वो यहां आई है।






