गुमला में ‘रोको और समझाओ’ अभियान: बिना हेलमेट चालकों को सड़क पर ही दी गई सुरक्षा की सीख

गुमला में ‘रोको और समझाओ’ अभियान: बिना हेलमेट चालकों को सड़क पर ही दी गई सुरक्षा की सीख

गुमला — दिन में विद्यालयों में सड़क सुरक्षा का संदेश देने के बाद सोमवार शाम शहर की सड़कों पर जागरूकता का एक अलग ही दृश्य देखने को मिला। उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो के निर्देश पर पॉलिटेक्निक कॉलेज के समीप विशेष ‘रोको और समझाओ’ अभियान चलाया गया, जिसका उद्देश्य चालान से अधिक लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बनाना था। अभियान की अगुवाई जिला परिवहन पदाधिकारी ज्ञान शंकर जायसवाल ने की।
इस अभियान में ‘डेन्जर्स एडवेंचर्स’ पैदल विश्व भ्रमण दल के सदस्य—जितेंद्र प्रताप, महेंद्र प्रताप और गोविंदा नंद—भी मौजूद रहे। विश्व शांति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश लेकर पदयात्रा कर रहा यह दल इन दिनों जिले में सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रमों में भाग ले रहा है।
चालान नहीं, संवाद पर जोर
शाम के समय आम तौर पर वाहन जांच से लोग बचने की कोशिश करते हैं, लेकिन इस अभियान का स्वरूप अलग था। दोपहिया वाहन चालकों को रोककर हेलमेट के महत्व, तेज रफ्तार के खतरे, मोबाइल के उपयोग से होने वाले जोखिम और ट्रैफिक नियमों के पालन की आवश्यकता पर सीधे संवाद के माध्यम से समझाया गया।
बिना हेलमेट चालकों को समझाइश: हेलमेट न पहनने वालों को रोककर दुर्घटना की स्थिति में संभावित गंभीर परिणामों के बारे में विस्तार से बताया गया।
नियम पालन करने वालों का उत्साहवर्धन: हेलमेट पहनकर चल रहे चालकों की सराहना कर उनका मनोबल बढ़ाया गया।
पदयात्रियों का संदेश बना आकर्षण
विश्व भ्रमण दल के सदस्यों ने युवाओं से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि सुरक्षा नियमों का पालन जीवन की रक्षा का सबसे सरल तरीका है। उनके अनुभवों ने उपस्थित लोगों पर गहरा प्रभाव छोड़ा और कई युवाओं ने मौके पर ही आगे से हेलमेट अनिवार्य रूप से पहनने का संकल्प लिया।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश
डीटीओ ने बताया कि यह पहल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। हेलमेट चालान से बचने का साधन नहीं, बल्कि जीवन रक्षा का उपाय है। प्रशासन का उद्देश्य दंडात्मक कार्रवाई से पहले जागरूकता के माध्यम से व्यवहार में बदलाव लाना है।
अभियान में रही टीम की सक्रिय भागीदारी
अभियान को सफल बनाने में मोटरयान निरीक्षक प्रदीप कुमार तिर्की, सड़क सुरक्षा प्रबंधक कुमार प्रभाष, रोड इंजीनियरिंग एनालिस्ट प्रणय कांशी और आईटी सहायक मंटू रवानी सहित सड़क सुरक्षा से जुड़े कर्मियों की सक्रिय भूमिका रही।