गिरिडीह में धूमधाम से मनाया गया खालसा पंथ का 327वां स्थापना दिवस, गुरुद्वारा में उमड़ी संगत

खालसा मेरो रूप है खास, खालसे मैं हूं करो निवास…
धूमधाम से मनाया गया खालसा पंथ का 327 वां स्थापना दिवस

बैसाखी को लेकर गुरूद्वारा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

शब्द कीर्तन और लंगर का आयोजन, मेयर प्रमिला मेहरा समेत कई गणमान्य लोगों ने लिया हिस्सा

गिरिडीह। वैशाखी पर्व को लेकर स्टेशन रोड स्थित गुरूद्वारा गुरू सिंह सभा में मंगलवार को भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान गुरूद्वारा को आकर्षक रूप से सजाया गया था। मौके पर गुरू ग्रंथ साहिब को बहुत ही अच्छे ढंग से सजाया गया था। इस दौरान रागी जत्था भाई सतनाम सिंह और उनकी टीम के द्वारा कई शबद कीर्तन प्रस्तुत किया गया। जिसे सुनकर सात संगत निहाल हो गई। खालसा पंथ के 327 वें स्थापना दिवस को लेकर गुरूद्वारा गुरू सिंह सभा में 30 मार्च से चल रहे सहज पाठ का आज समापन हुआ। इस संबंध में जानकारी देते हुए गुरूद्वारा गुरू सिंह सभा के प्रधान डॉ गुणवंत सिंह मोंगिया ने बताया कि आज के दिन ही 13 अप्रैल 1699 ई0 में आनन्दपुर साहेब में खालसा पंथ की स्थापना दसमेश गुरू, गुरू गोबिंद सिंह जी महाराज ने की थी। आज के दिन उन्होंने लोगों के बीच अमृत का संचार किया था। कहा कि इस दिन को हमलोग बहुत ही उत्साह के साथ मनाते हैं। वैशाखी को हमलोग खालसा सिरजना दिवस के रूप में भी मनाते है।उन्होंने कहा कि सिखों का जो स्वरूप है वह आज के दिन ही हम लोगों को मिला था। गुरू गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना करते हुए सिख समाज को समाज और हिंदुओं की रक्षा के लिए तैयार किया था। इस दौरान गुरूद्वारे में भव्य लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें सिख समाज के अलावे अन्य समुदाय के लोगों ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान गुरुद्वारे में पहुंची मेयर प्रमिला मेहरा को गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के प्रधान के द्वारा शिरोपा देकर सम्मानित किया गया। मेयर प्रमिला मेहरा ने उपस्थित संगत को वैशाखी की शुभकामनाएं दी। लंगर की सेवा हर साल की तरह इस साल भी समाजसेवी रतन गुप्ता जी के द्वारा की गई थी। गुरूद्वारा प्रबंधन कमिटी के प्रधान डाॅ मोंगिया के द्वारा रतन गुप्ता को भी सिरोपा देकर सम्मानित किया। मौके पर गुरूद्वारा गुरूसिंह सभा के सचिव नरेंद्र सिंह सलूजा उर्फ सम्मी, चरणजीत सिंह सलूजा, अमरजीत सिंह सलूजा, कुवंरजीत सिंह सलूजा, कुशल सलूजा, मंजीत सिंह, गुरविंदर सिंह सलूजा, तरणजीत सिंह सलुजा उर्फ बंटी, प्रिंस सलूजा, राजकुमार सलूजा, राजू सलूजा, गुरदीप सिंह बग्गा, परमजीत सिंह कालू, ऋषि सिंह, राजेंद्र सिंह बग्गा, गुरभेज सिंह कालरा, राजू चावला, हरमिंदर सिंह बग्गा, गोल्डी सिंह, लक्की बग्गा, हर्षदीप सिंह दुआ, समेत काफी संख्या में समाज के महिला-पुरूष व बच्चे मौजूद थे।