गढ़वा में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन आचार्य आशीष बैद्य ने किया भगवान नरसिंह अवतार का वर्णन”
गढ़वा के दबगर मोहल्ला में दानरो नदी के तट समीप श्री राहुल डीसूजा जी के यहां आचार्य श्री आशीष बैद्य जी मुखारबिंद से दिनांक 30 अक्टूबर से 05 नवंबर तक श्री मद्भागवत कथा के आज चतुर्थ दिवस में भगवान नरसिंह अवतार की व्याख्या की गई।
आचार्य श्री बैद्य जी ने भक्तजनों को श्री मद्भागवत पुराण में वर्णित महा अत्याचारी, व्यभिचारी, दुराचारी राजा हिरण्यकश्यप के अत्याचारों से त्राहिमाम त्राहिमाम कर रही जनता को उनके कष्टों से निवारण हेतु उसी के पुत्र भक्त वत्सल प्रहलाद द्वारा भगवान को पुकारे जाने पर भगवान नरसिंह के रूप में अवतरित होकर हिरण्यकश्यप का वध कर इस धरती से पापियों का नाश किया।
आचार्य श्री बैद्य जी ने कहा कि जब जब धरती पर अधर्म का बोझ बढा है धर्मार्थ कार्यों में विघ्न डाला गया है, धर्मप्रेमियों को सताया गया है तो स्वयं भगवान धरती पर अवतरित हुए हैं और समस्त जीवों की रक्षा की है। हिरण्यकश्यप अमरत्व जैसे प्राप्त वरदान में मादान्ध हो गया था फिर भी उसका अंत हुआ । इस कलयुग में समस्त भक्तजनों को अपना जीवन धर्म कार्यों में लगाना चाहिए जिससे यह मानव जीवन की नैया स्वयं भगवान पार लगाएंगे।

