“डॉ. राम दयाल मुंडा: आदिवासी समाज की आवाज को 86वीं जयंती पर किया गया नमन

अनुसूचित जाति, जनजाति छात्र संघर्ष मोर्चा के जिला कार्यालय में रांची विश्वविद्यालय रांची के पूर्व कुलपति पद श्री डॉ राम दयाल मुंडा की वीं 86 जयंती मनाई गई कार्यक्रम की अध्यक्षता मोर्चा अध्यक्ष उदय राम एवं संचालन संजय कुमार ने किया। सर्वप्रथम राम दयाल मुंडा के तस्वीर पर फूल माला चढ़ा कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई।
मोर्चा अध्यक्ष उदय राम ने कहा कि राम दयाल मुंडा अंतरास्ट्रीय स्तर के भाषा विध समाज शास्त्री और बुद्धिजीवी साहित्य कार ही नहीं थे बल्कि एक अप्रतिम आदिवासी कलाकार भी थे उनका जन्म 23 अगस्त 1939 ईस्वी को रांची के तमाड़ प्रखंड के दिउड़ी गांव में हुआ था राम दयाल मुंडा 2 जुलाई 1986 से जनवरी 1987 तक रांची विश्वविद्यालय के कुलपति थे इनका कार्यकाल काफी शानदार रहा है राम दयाल मुंडा भारतीय विद्वान एवं संगीत के प्रति पादक थे इनको वसुरी बजाने एवं मांदर बजाने में महारथ साहिल था वे जहां भी जाते थे वासुरी साथ लेकर जाते थे कला के क्षेत्र में इनके असीम योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने 2010 में पद श्री पुरस्कार दिया था आदिवासी समाज के हक अधिकार के लिए रांची,पटना, दिल्ली सहित अंतरास्ट्रीय मंचों पर आवाज उठाएं थे आदिवासियों को चलना ही मृत, बोलना ही गीत, शरीर ही मांदर को चरितार्थ किया था राम दयाल मुंडा ने। वे हमेशा कहा करते थे कि नाची से बाची मोर्चा अध्यक्ष ने कहा कि राम दयाल मुंडा आदिवासी समाज के आवाज थे झारखंड के नवनिर्माण में इनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। अरविन्द कुमार ने राम दयाल मुंडा के जीवनी पर प्रकाश डाला एवं कहा कि आदिवासी समाज नशा पान, कुरीतियों, अंधविश्वास से बचे एवं शिक्षा पर विशेष ध्यान दें इस अवसर पर अभिषेक पासवान, राहुल कुमार, बादल कुमार, रूपेश कुमार मनेश उरांव आकांक्षा लकड़ा, प्रभात कुमार, विवेक कुमार, शेखर कुमार सहित कई लोग उपस्थित थे उपेन्द्र रजक ने धन्यवाद ज्ञापित किया।