दृढ़ प्रण के लिए अमर रहेगा महाराणा प्रताप का समर्पण : डॉ. पातंजली

दृढ़ प्रण के लिए अमर रहेगा महाराणा प्रताप का समर्पण : डॉक्टर पातंजली
आर. पी. सेवा सदन में मनी महाराणा प्रताप की जयंती
गढ़वा । शहर के साईं मुहल्ला स्थित आर.पी. सेवा सदन में शनिवार को वीर योद्धा एवं मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप सिंह की जयंती मनाई गई । भाजपा नेता सह चिकित्सक डॉक्टर पातंजली केशरी सहित कार्यक्रम में उपस्थित अन्य लोगों ने महाराणा प्रताप की तस्वीर पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर अपने देश की प्रति त्याग, सेवा और समर्पण का भाव रखते हुए काम करने का संकल्प लिया ।
आर.पी. एजुकेशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट के निदेशक डॉक्टर पातंजली केशरी ने कहा कि भारतीय इतिहास में कुछ ऐसे महापुरुष हुए जिनकी वीरता, समर्पण और मातृभूमि के प्रति प्रेम आज भी लोगों को प्रेरित करता है ।महाराणा प्रताप वीर योद्धा थे जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मातृभूमि की रक्षा में समर्पित कर दिया । महाराणा प्रताप के बलिदान से हम लोगों को सीख लेनी चाहिए । आज हमें यह संकल्प लेने का दिन है कि परिस्थितियां कितनी भी संकटकालीन क्यों ना हो, मातृभूमि की रक्षा से बड़ा कोई कर्तव्य नहीं है । उन्होंने कहा कि मुगल सम्राट अकबर द्वारा दिए गए झूठे आश्वासन, अधिकार और प्रलोभन से वशीभूत होकर कई राजपूत राजाओं ने उसका प्रभुत्व स्वीकार कर लिया था और उसके आश्रित हो गए थे । सुखी जीवन की लालसा में अपना गौरव खो चुके थे । उस समय की स्थिति की जानकारी लेने पर पता चलता है कि राजस्थान ही नहीं मानो सारा भारत ही अपना आत्म गौरव खो चुका था । ऐसी प्रतिकूल परिस्थिति में महाराणा प्रताप ने कड़ा मुकाबला किया और टक्कर दी । ऐसा सुना जाता है कि जंगल में रहने के दौरान उन्होंने मांस मुर्गा नहीं बल्कि घास की रोटी खाकर अपने मातृभूमि की रक्षा की । आज के दौर में कोरोना काल जैसी स्थिति से निपटने के लिए भी मानव समाज के लिए संदेश है । वायरस संक्रमण के इंफेक्शन से बचने के लिए हमें अपने खान-पान पर भी ध्यान देना चाहिए । ऐसे वीर सपूत को हम सभी नमन करते हैं । साथ ही उनके पद चिन्हों पर चलने का संकल्प लेते हैं ।
राजकुमार मद्धेशिया ने कहा कि वीरता, शौर्य, त्याग और पराक्रम के लिए महाराणा प्रताप अमर हैं । वर्ष 1576 में हल्दीघाटी का युद्ध उनके जीवन का महत्वपूर्ण युद्ध था। जो अदम्य साहस का प्रतीक है । दिवेर के युद्ध में मुगलों को हराकर मेवाड़ का बड़ा हिस्सा वापस लिया था। और वीरता का परचम लहराया था।
ज्योति प्रकाश ने कहा कि अपनी आजादी को हरगिज मिटा सकते नहीं, सर कटा सकते हैं लेकिन सिर झुका सकते नहीं । यह पंक्ति शत प्रतिशत महाराणा प्रताप की जीवनी में चरितार्थ होती है । जो आज भी प्रासांगिक है । उन्होंने मुगलों के समक्ष कभी पराजय स्वीकार नहीं किया। गुलामी के जीवन को तिरष्कृत कर स्वतंत्र रहे । हमें ऐसे देशभक्त के सिद्धांतों को आत्मसात करना चाहिए।
मौके पर डॉक्टर आदिल, डॉक्टर अंजलि, संगीता कुमारी, गोलू राज, अंकित प्रजापति, सुनील कुमार, रंजना कुजूर, अंजलि कुमारी, लालसा कुमारी, फेयाज अहमद, प्रेम कुमार, संतोष कुमार, दीपक यादव, रंजय कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित थे ।