CISF की कार्रवाई, 4 कर्मचारी पकड़ाए, कर दिया चौंकाने वाला खुलासा

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CISF की कार्रवाई, 4 कर्मचारी पकड़ाए, कर दिया चौंकाने वाला खुलासा

 

नई दिल्ली: दिल्ली एयरपोर्ट पर कबूतरबाजी का मामला सामने आया है। इसमें एयर इंडिया सेट्स के कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई है। आरोपी कर्मचारी इमिग्रेशन विभाग को चकमा देकर दस्तावेज पूरे नहीं होने के बावजूद रुपये लेकर लोगों को विदेश भेज रहे थे, लेकिन सीआईएसएफ के सक्रिय होने से इस गैंग का पर्दाफाश हो गया है। सीआईएसएफ ने एक यात्री और एयर इंडिया सेट्स के चार कर्मचारियों को पुलिस के हवाले कर दिया है। पकड़े गए आरोपियों में यात्री दिलजोत सिंह और कर्मचारी रोहन वर्मा, मो. जहांगीर, यश और अक्षय नारंग शामिल है। बुधवार दोपहर एक यात्री को संदिग्ध हालात में सीआईएसएफ ने गेट संख्या 5 पर देखा।

सीसीटीवी के माध्यम से उसकी जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि उसे 1.15 बजे एयर इंडिया के विमान से बर्मिंघम जाना था। उसने एयर इंडिया के एफ-11 काउंटर से चेक-इन किया। जांच में उसके दस्तावेजों में कमी मिली। इसके चलते इमिग्रेशन अधिकारी ने उसे एयर इंडिया के कर्मचारी को बुलाकर लाने के लिए कहा, लेकिन वह न तो कर्मचारी को बुलाने गया और न ही लौटकर इमिग्रेशन के पास गया। सीआईएसएफ ने आगे छानबीन की तो पता चला कि एफ-11 काउंटर पर बैठे कर्मचारी रोहन वर्मा ने गलत दस्तावेज पर उसे चेक-इन करवाया है। वह सी-मेन (समुद्र कर्मचारी) के पत्र पर सफर कर रहा था, जबकि रोहन ने उसे बायोमेट्रिक रेजिडेंट परमिट पर प्रवेश कराया है। रोहन ने उन्हें बताया कि तीन यात्रियों को इस तरह प्रवेश कराने के लिए उसे 80 हजार रुपये दूसरे कर्मचारी मो. जहांगीर ने दिए थे। जहांगीर ने पूछताछ में बताया कि तीन यात्रियों को भेजने के लिए महिपालपुर निवासी राकेश ने उसे 1.20 लाख रुपये दिए थे। इसकी जानकारी एयर इंडिया सेट्स के विजिलेंस में तैनात सीनियर मैनेजर सतीश कुमार को दी गई। इस दौरान उन्होंने छानबीन में पाया कि दो अन्य कर्मचारी यश और अक्षय नारंग भी इसमें शामिल हैं।

विदेश भेजे जा रहे यात्रियों के पास सी-मेन का पत्र था। लेकिन एयरलाइंस कर्मचारी चेक-इन करवाते समय उसकी जगह बायोमेट्रिक रेजिडेंट परमिट पर उनका सफर दिखा रहे थे। आमतौर पर इमिग्रेशन की ओर से ऐसे लोगों की जांच नहीं की जाती। इसके चलते दो यात्री आसानी से विदेश चले गए, लेकिन दिलजोत के मामले में इमिग्रेशन अधिकारी ने उसके दस्तावेजों की जांच कर ली, जिससे फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया।

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