छूते ही टूट रहा निर्माण! JE की आपत्ति के बाद भी काम जारी रहने का आरोप
छूते ही टूट रहा निर्माण! JE की आपत्ति के बाद भी जारी रहा काम, बिना सुरक्षा ऊंचाई पर मजदूर—बोहटा ऑटोडोरियम में करोड़ों के निर्माण पर बड़ा सवाल
रामप्रवेश गुप्ता
महुआडांड़ बोहटा में करोड़ों रुपये की लागत से निर्माणाधीन ऑटोडोरियम के दूसरे भवन को लेकर अब मामला बेहद गंभीर होता जा रहा है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने ऐसे आरोप लगाए हैं, जिनसे सरकारी निर्माण की पूरी निगरानी व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। ग्रामीणों का दावा है कि निर्माण की कुछ जगहों पर लगा मसाला/प्लास्टर इतना कमजोर है कि छूने भर से परत टूटकर झड़ रही है। निर्माण स्थल की तस्वीरों को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए तत्काल तकनीकी जांच की मांग की है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विभागीय जेई मनीष पुरण ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर असंतोष जताते हुए संवेदक को काम रोककर आवश्यक सुधार करने का निर्देश दिया था, तो इसके बाद भी निर्माण कार्य आखिर क्यों जारी रहा?
छूने से टूट रहा मसाला तो अंदर की मजबूती का क्या होगा?
निर्माण स्थल से सामने आई तस्वीरों को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि तस्वीरों में निर्माण की सतह की हालत साफ दिखाई दे रही है और कथित तौर पर कुछ हिस्सों को हाथ लगाने पर ही मसाला टूटकर गिर रहा है।अगर मौके पर वास्तव में निर्माण सामग्री इतनी कमजोर है तो यह केवल प्लास्टर की समस्या नहीं मानी जा सकती, बल्कि निर्माण की पूरी गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच जरूरी हो जाती है। आखिर करोड़ों रुपये खर्च कर बनने वाली इमारत में ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई, इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
हालांकि भवन की वास्तविक मजबूती का फैसला केवल तस्वीर देखकर नहीं किया जा सकता। इसके लिए अधिकृत तकनीकी जांच, सामग्री के नमूने और प्रयोगशाला परीक्षण जरूरी हैं। ग्रामीणों की मांग भी यही है कि अब कागजी जांच नहीं, बल्कि मौके से नमूना लेकर वैज्ञानिक जांच कराई जाए।
JE ने आपत्ति जताई, फिर भी संवेदक पर किसका हाथ?
ग्रामीणों के अनुसार भवन निर्माण विभाग के जेई मनीष पुरण ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर असंतोष जताया था और संवेदक को आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद काम जारी रहने का आरोप है।यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—यदि विभागीय तकनीकी अधिकारी ने निर्माण पर आपत्ति जताई थी तो काम रोकने के आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ?क्या संवेदक ने विभागीय निर्देश को नजरअंदाज किया? क्या निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की कोई दूसरी अनुमति मिली थी? या फिर किसी स्तर से दबाव बनाया गया? इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकता है।
करोड़ों की सरकारी राशि, लेकिन निर्माण की हालत पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि ऑटोडोरियम का निर्माण कोई सामान्य निजी भवन नहीं है। इसमें करोड़ों रुपये की सरकारी राशि खर्च हो रही है। ऐसे में निर्माण की गुणवत्ता में मामूली भी लापरवाही भविष्य में बड़ी समस्या बन सकती है यदि निर्माण सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है या काम स्वीकृत प्राक्कलन के अनुसार नहीं किया गया है तो भवन की मजबूती और टिकाऊपन पर गंभीर असर पड़ सकता है। ग्रामीणों ने सीमेंट, बालू, गिट्टी, सरिया सहित निर्माण में इस्तेमाल प्रत्येक प्रमुख सामग्री की गुणवत्ता जांच कराने की मांग की है।
ऊंची दीवार पर बिना सुरक्षा मजदूर—हादसा हुआ तो कौन होगा जिम्मेदार?
निर्माण स्थल पर मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। ग्रामीणों के अनुसार मजदूर बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के ऊंची दीवारों पर काम कर रहे हैं।ऊंचाई पर काम करने वाले मजदूरों के लिए आवश्यक सुरक्षा उपकरण और सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त हैं या नहीं, इसकी तत्काल जांच की मांग की गई है। ग्रामीणों ने कहा कि करोड़ों का भवन बनाना जरूरी है, लेकिन किसी मजदूर की जान जोखिम में डालकर नहीं।अगर ऊंचाई से कोई मजदूर गिरकर गंभीर रूप से घायल होता है या जान चली जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय हादसा होने से पहले सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
जनप्रतिनिधियों के सामने भी फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
निर्माण स्थल पर जिला परिषद सदस्य इस्तेला नागेसिया और प्रखंड प्रमुख कंचन कुजूर की मौजूदगी में भी स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य पर सवाल उठाए। ग्रामीणों ने कहा कि सरकारी योजना में गुणवत्ता से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।ग्रामीणों ने मांग की कि निर्माण स्थल की तत्काल मापी कराई जाए और स्वीकृत नक्शे तथा प्राक्कलन से मिलान किया जाए। साथ ही निर्माण के प्रत्येक चरण में विभागीय तकनीकी निगरानी सुनिश्चित की जाए।
हड़बड़ी में भवन खड़ा करने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य को जल्द पूरा करने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि यदि गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ चुके हैं तो सबसे पहले काम रोककर जांच और सुधार होना चाहिए।हड़बड़ी में भवन खड़ा कर देना विकास नहीं है, बल्कि भविष्य के खतरे को न्योता देना है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर निर्माण पूरा होने से पहले ही कमजोरी सामने आ रही है तो प्रशासन को इसे गंभीर चेतावनी मानते हुए तत्काल जांच करनी चाहिए।
DC से सीधी मांग—पहले जांच, फिर निर्माण
ग्रामीणों ने लातेहार उपायुक्त संदीप कुमार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों की मांग है कि तकनीकी जांच पूरी होने तक संदिग्ध निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए।
उन्होंने उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र तकनीकी टीम से जांच कराने की मांग की है। जांच में—
निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, स्वीकृत प्राक्कलन, नक्शा, तकनीकी मानक, मापी-पुस्तिका, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट, विभागीय निरीक्षण, जेई की आपत्ति और अब तक किए गए भुगतान को शामिल करने की मांग की गई है।
गड़बड़ी मिली तो संवेदक पर हो कार्रवाई
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि यदि जांच में निर्माण कार्य में अनियमितता, घटिया सामग्री या तकनीकी मानकों की अनदेखी साबित होती है तो दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।दोष साबित होने पर संबंधित संवेदक को ब्लैकलिस्ट करने, सरकारी राशि के नुकसान की जिम्मेदारी तय करने और नियमों के तहत कठोर कार्रवाई करने की मांग की गई है।


