बरवाडीह के पत्रकार तस्लीम खान बने मिसाल, खेती से लिख रहे सफलता की नई कहानी

बरवाडीह(लातेहार) बरवाडीह प्रखंड क्षेत्र के छेचा पंचायत अंतर्गत ग्राम छेचा में बिरसा हरित आम बागवानी योजना के तहत लाभुक वरिष्ठ पत्रकार सह किसान तस्लीम खान अपनी मेहनत और लगन से खेती को नई पहचान दे रहे हैं। पत्रकारिता के साथ-साथ कृषि को अपना मुख्य पेशा मानने वाले तस्लीम खान ने अपनी निजी रैयती जमीन को उपजाऊ बनाकर एक मिसाल पेश की है। उन्होंने लगभग एक एकड़ भूमि को घेराबंदी कर खेती योग्य बनाया है, जहां आम बागवानी के साथ-साथ हरी सब्जियों की भी भरपूर खेती की जा रही है। खेत में भिंडी, खीरा, ककड़ी, कद्दू, प्याज, नेनुआ, करेला, टमाटर, बैंगन सहित कई प्रकार की हरी सब्जियां उगाई जा रही हैं। भीषण गर्मी के बावजूद वे स्वयं खेत में सिंचाई कर फसलों की देखरेख करते हैं और समय निकालकर मेहनत भी करते हैं। तस्लीम खान बताते हैं कि घर की जरूरत के लिए ताजी सब्जियां यहीं से मिल जाती हैं। अधिक उत्पादन होने पर वे घर से ही उचित दाम पर स्थानीय लोगों को सब्जियां बेच देते हैं।आसपास के लोग भी जानते हैं कि उनके यहां ताजी और अच्छी सब्जियां उपलब्ध होती हैं। खेती-बाड़ी के इस कार्य में उनकी धर्मपत्नी भी पूरा सहयोग करती हैं। जब तस्लीम खान पत्रकारिता के सिलसिले में बाहर जाते हैं, तब उनकी अर्धांगिनी खेत की निगरानी और देखरेख संभालती हैं। आम बागवानी के साथ-साथ मौसम के अनुसार दूसरी जमीन पर धान, मक्का, गेहूं, सरसों और अरहर की भी खेती की जाती है। जरूरत से अधिक उत्पादन होने पर उसे बाजार या स्थानीय साहुकारों को बेच दिया जाता है। तस्लीम खान का कहना है कि खेती उनके परिवार की पुरानी परंपरा है। उनके पिता भी खेती करते थे। और आज वे स्वयं इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहां कि खेती करने से न केवल परिवार की जरूरतें पूरी होती हैं, बल्कि शरीर भी स्वस्थ रहता है। उन्होंने आगे भी खेती को इसी तरह जारी रखने की बात कही। पत्रकारिता और कृषि दोनों क्षेत्रों में उनका यह संतुलन क्षेत्र के लोगों के लिए प्रेरणादायक बन गया है।