बरवाडीह के पैरा गांव में दो साल में ही खराब हुई जलमीनार, सूखा हैंडपंप; पेयजल संकट से परेशान ग्रामीण

बरवाडीह के पैरा गांव में जलमीनार खराब, पानी के लिए भटक रहे ग्रामीण; हैंडपंप भी सूखा

दो साल में ही खराब हो गई जलमीनार, ग्रामीणों के सामने गहराया पेयजल संकट

बरवाडीह से अर्चना कुमारी की रिपोर्ट।
बरवाडीह। लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत ग्राम पैरा, पंचायत उकामाड़ में पेयजल की समस्या ने स्थानीय ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2018 में गांव में जलमीनार का निर्माण कराया गया था। लेकिन ग्रामीणों के अनुसार, निर्माण के महज दो वर्षों के भीतर ही जलमीनार खराब हो गई। इसके बाद से ग्रामीणों को पेयजल के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, गांव में लगा हैंडपंप भी सूख चुका है, जिससे लोगों के सामने पानी की समस्या और गंभीर हो गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि जलमीनार का निर्माण इस उम्मीद के साथ कराया गया था कि गांव के लोगों को आसानी से पीने का पानी उपलब्ध हो सकेगा। लेकिन जलमीनार खराब होने के कारण यह उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है। दूसरी ओर, हैंडपंप के सूख जाने से पानी प्राप्त करने का एक अन्य साधन भी बंद हो गया है। ऐसे में ग्रामीणों को अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

पेयजल की समस्या का सबसे अधिक असर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। घरों में खाना बनाने, पीने, साफ-सफाई और अन्य जरूरी कार्यों के लिए पानी की आवश्यकता होती है। लेकिन गांव में जलमीनार और हैंडपंप दोनों के खराब होने से ग्रामीणों के सामने पानी की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

ग्रामीणों के लिए यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है, क्योंकि जलमीनार का निर्माण सरकारी राशि खर्च कर पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था। लेकिन यदि निर्माण के कुछ ही वर्षों बाद जलमीनार खराब हो जाए और लंबे समय तक उसकी मरम्मत नहीं हो, तो ग्रामीणों को इसका लाभ कैसे मिल पाएगा? यह सवाल अब व्यवस्था पर उठने लगा है।

ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए गांव की खराब जलमीनार की जांच कराए। साथ ही, जलमीनार की आवश्यक मरम्मत कराकर उसे जल्द से जल्द चालू कराया जाए। इसके अलावा, सूखे हैंडपंप की स्थिति की भी जांच कर पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।