हजारीबाग में कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस, SIR और निर्वाचन आयोग पर उठाए सवाल

हजारीबाग दिनांक 27 सितंबर 2026 को झारखंड प्रदेश कॉंग्रेस कमिटी के महासचिव एवं जिला प्रभारी राजीव रंजन प्रसाद प्रदेश प्रवक्ता जकाउल्ला जिलाध्यक्ष जे पी पटेल ने संयुक्त रूप की प्रेस कांफ्रेंस किया मौके पर बरही के पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला जिला कॉंग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष निसार खान मौजूद रहे l

निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली, मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी, SIR प्रक्रिया तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त के संबंध में उठे गंभीर प्रश्नों को लेकर कांग्रेस की मांगें

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने एक सजग राजनैतिक दल एवं मुख्य विपक्षी दल होने के नाते निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया तथा मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। इसी क्रम में अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी द्वारा देशव्यापी कार्यक्रम का निर्णय लिया गया है। झारखंड में भी इन विषयों को लेकर प्रदेश एवं जिला स्तर पर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया जा रहा है।

AICC के दिनांक 24 सितंबर 2026 के निर्देश के अनुसार, 28 सितंबर 2026 को प्रत्येक जिला मुख्यालय से कलेक्ट्रेट तक विरोध मार्च आयोजित किया जाना है।

कांग्रेस द्वारा उठाए जा रहे प्रमुख प्रश्न निम्नलिखित हैं—

पहला — निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही।

AICC के परिपत्र में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले दस महीनों के दौरान दो निर्वाचन आयुक्तों द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त से संबंधित निर्णयों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज किए जाने का उल्लेख किया गया है। कांग्रेस का कहना है कि इन आपत्तियों के माध्यम से निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया और SIR से संबंधित कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न सामने आते हैं।

दूसरा — SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची की विश्वसनीयता।

विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के अंतर्गत मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने अथवा संशोधन की प्रक्रिया सीधे नागरिकों के मताधिकार से जुड़ी हुई है। इसलिए कांग्रेस की मांग है कि ऐसी प्रत्येक प्रक्रिया पूर्ण पारदर्शिता, निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और पर्याप्त सार्वजनिक जांच के साथ संचालित हो।

तीसरा — निर्वाचन आयोग की IT प्रणाली और डेटा प्रबंधन।

परिपत्र में निर्वाचन आयोग की IT प्रणाली को दिल्ली में केंद्रीकृत किए जाने तथा इस प्रक्रिया के संबंध में निर्वाचन आयुक्तों को पर्याप्त जानकारी नहीं दिए जाने का आरोप दर्ज है। कांग्रेस की मांग है कि निर्वाचन संबंधी डिजिटल प्रणालियों, डेटा प्रबंधन और निर्णय प्रक्रिया की स्वतंत्र एवं व्यापक समीक्षा हो, ताकि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर किसी प्रकार का प्रश्नचिह्न न रहे।

चौथा — मतदाता सूची में किए गए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा।

मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार है। इसलिए कांग्रेस ने मांग रखी है कि वर्तमान एवं पूर्ववर्ती प्रक्रियाओं के दौरान मतदाता सूची में किए गए बदलावों की व्यापक और स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए। यह समीक्षा पारदर्शी हो तथा उसके निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं।

पांचवां — मुख्य निर्वाचन आयुक्त के संबंध में उठे आरोपों की निष्पक्ष जांच हो l

मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी, पद से हटाए जाने तथा उनके कार्यकाल में लिए गए निर्णयों एवं मतदाता सूची में किए गए बदलावों की व्यापक और स्वतंत्र समीक्षा की मांग।

कांग्रेस इन मांगों को लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही, मतदाता के अधिकार तथा चुनावी प्रक्रिया में जनता के विश्वास से जोड़कर देखती है।

हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि मतदाता सूची में किसी भी पात्र नागरिक का नाम बिना उचित प्रक्रिया के प्रभावित नहीं होना चाहिए और किसी भी अपात्र व्यक्ति का नाम भी नियमानुसार जांच के बाद ही शामिल किया जाना चाहिए। चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए सभी संबंधित संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है।

कांग्रेस की प्रमुख मांगें

  1. मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार के संबंध में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए।
  2. उनके कार्यकाल में लिए गए निर्णयों की व्यापक एवं स्वतंत्र समीक्षा की जाए।
  3. SIR प्रक्रिया के अंतर्गत मतदाता सूची में किए गए जोड़, विलोपन एवं अन्य संशोधनों की स्वतंत्र समीक्षा हो।
  4. निर्वाचन आयोग की IT प्रणाली, डेटा प्रबंधन एवं केंद्रीकरण से संबंधित प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच/ऑडिट कराई जाए।
  5. मतदाता सूची से संबंधित सभी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और नागरिकों को प्रभावी आपत्ति एवं सुनवाई का अवसर सुनिश्चित किया जाए।
  6. चुनावी प्रक्रिया से जुड़े निर्णयों में संस्थागत जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी द्वारा इन विषयों को लेकर राज्य एवं जिला स्तर पर निर्धारित कार्यक्रमों में भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। AICC के निर्देशानुसार PCC पदाधिकारी, DCC नेतृत्व, CLP नेता, सांसद, विधायक, वरिष्ठ नेता, फ्रंटल संगठन, विभाग, प्रकोष्ठ एवं जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया है।

यह विषय किसी एक राजनीतिक दल का मात्र संगठनात्मक विषय नहीं, बल्कि मतदाता सूची की विश्वसनीयता और नागरिकों के मताधिकार से संबंधित सार्वजनिक संस्थागत प्रश्नों के रूप में देखा जाना चाहिए।

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से इन प्रश्नों को संबंधित संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष रखेगी और पारदर्शी जांच तथा जवाबदेही की मांग करेगी।