गढ़वा के ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल में धूमधाम से मना आयुर्वेद दिवस, विद्यार्थियों ने लगाए औषधीय पौधे
ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल में धूमधाम से मनाया गया आयुर्वेद दिवस
विद्यार्थियों ने लगाए औषधीय पौधे, आयुर्वेद के महत्व और स्वस्थ जीवनशैली का दिया संदेश
गढ़वा। ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल, गढ़वा में आयुर्वेद दिवस बड़े ही उत्साह, उमंग और धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में विभिन्न कार्यक्रमों एवं गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिनका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को आयुर्वेद की प्राचीन एवं समृद्ध परंपरा, औषधीय पौधों के महत्व तथा स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में विद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अन्य कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
आयुर्वेद दिवस के अवसर पर विद्यालय के विद्यार्थियों ने आयुर्वेद से संबंधित विभिन्न औषधीय एवं उपयोगी पौधों का पौधरोपण किया। विद्यार्थियों ने विद्यालय परिसर में पौधे लगाकर न केवल आयुर्वेद के प्रति अपनी रुचि प्रदर्शित की, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का भी परिचय दिया। विद्यार्थियों को बताया गया कि हमारे आसपास पाए जाने वाले अनेक पौधे पारंपरिक रूप से स्वास्थ्य एवं औषधीय उपयोगों से जुड़े रहे हैं। तुलसी, नीम, गिलोय, एलोवेरा, अश्वगंधा, आंवला तथा अन्य औषधीय वनस्पतियां भारतीय जीवन परंपरा में लंबे समय से महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं।
पौधरोपण के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक पौधे लगाए और उनके संरक्षण एवं देखभाल का संकल्प लिया। विद्यालय परिसर में पौधों की देखभाल, नियमित सिंचाई तथा उनके विकास पर ध्यान देने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया गया। इस गतिविधि के माध्यम से बच्चों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि प्रकृति और मानव स्वास्थ्य का आपस में गहरा संबंध है। स्वच्छ पर्यावरण, पौधों की उपलब्धता और संतुलित जीवनशैली स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य डॉ. नीरकेश शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि “आयुर्वेद हमारे जीवन के लिए अत्यंत ही शुभकारी एवं फलदायी है।” उन्होंने कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें प्रकृति, जीवनशैली, खान-पान और स्वास्थ्य के बीच संतुलन पर विशेष जोर दिया जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आयुर्वेद को केवल औषधियों तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की समग्र सोच के रूप में भी समझना चाहिए।
डॉ. शर्मा ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में स्वस्थ रहना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे समय में संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, स्वच्छता, शारीरिक गतिविधि और प्रकृति के साथ जुड़ाव का महत्व और भी बढ़ जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने दैनिक जीवन में स्वास्थ्यवर्धक आदतों को अपनाने तथा अनावश्यक रूप से अस्वास्थ्यकर खान-पान से बचने के लिए प्रेरित किया।
प्राचार्य ने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि विद्यालय में इस प्रकार की गतिविधियों का उद्देश्य केवल किसी विशेष दिवस का आयोजन करना नहीं, बल्कि बच्चों में व्यवहारिक एवं जीवनोपयोगी ज्ञान विकसित करना है। जब विद्यार्थी स्वयं पौधे लगाते हैं और उनकी देखभाल करते हैं, तो उनमें प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और अनुशासन की भावना विकसित होती है। उन्होंने कहा कि विद्यालय शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान प्रदान करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को स्वस्थ, जागरूक, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनाना भी है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने आयुर्वेद एवं औषधीय पौधों से संबंधित विभिन्न जानकारियां भी प्राप्त कीं। शिक्षकों ने बच्चों को बताया कि भारतीय परंपरा में अनेक पौधों का उपयोग घरेलू स्तर पर विभिन्न रूपों में किया जाता रहा है। साथ ही विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि किसी भी औषधीय पौधे या जड़ी-बूटी का चिकित्सकीय उपयोग विशेषज्ञ चिकित्सक या योग्य आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए। इस प्रकार विद्यार्थियों को आयुर्वेद के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ वैज्ञानिक एवं जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने का संदेश भी दिया गया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। बच्चों ने पौधरोपण को केवल एक गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि प्रकृति की सेवा और स्वस्थ भविष्य की दिशा में एक छोटे से प्रयास के रूप में लिया। कई विद्यार्थियों ने पौधों की देखभाल करने और अपने घरों में भी औषधीय एवं उपयोगी पौधे लगाने की इच्छा व्यक्त की। इससे कार्यक्रम का उद्देश्य और अधिक सार्थक दिखाई दिया।
विद्यालय की शिक्षिका सुश्री सुनैना कुमारी सहित अन्य शिक्षक एवं स्टाफ सदस्य भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। शिक्षकों ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया तथा पौधरोपण एवं जागरूकता गतिविधियों में उनका उत्साहवर्धन किया। विद्यालय परिवार के सदस्यों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, परंपरागत ज्ञान, पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक होते हैं।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया गया कि स्वस्थ जीवन केवल बीमारी से मुक्त रहने का नाम नहीं है, बल्कि शरीर, मन और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक है। आयुर्वेद की जीवनशैली संबंधी अवधारणाओं में दिनचर्या, ऋतु के अनुसार जीवनशैली, संतुलित भोजन और प्रकृति के साथ सामंजस्य जैसे विषयों को महत्व दिया जाता है। विद्यार्थियों को इन बातों को अपने जीवन में वैज्ञानिक समझ और उचित मार्गदर्शन के साथ अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
आयुर्वेद दिवस के अवसर पर विद्यालय परिसर में लगाए गए औषधीय पौधे आने वाले समय में विद्यार्थियों के लिए जीवंत शिक्षण-संसाधन के रूप में भी काम करेंगे। बच्चे इन पौधों को देखकर उनके नाम, उपयोग, संरक्षण और पर्यावरणीय महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इस प्रकार विद्यालय में शिक्षा को कक्षा की चारदीवारी से बाहर निकालकर प्रकृति और व्यवहारिक अनुभवों से जोड़ने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों एवं स्टाफ सदस्यों ने पौधों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने का संकल्प लिया। विद्यालय के प्राचार्य डॉ. नीरकेश शर्मा ने सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को कार्यक्रम की सफलता के लिए बधाई देते हुए कहा कि छोटे-छोटे प्रयास ही भविष्य में बड़े परिवर्तन का आधार बनते हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक पौधा लगाए और उसकी जिम्मेदारीपूर्वक देखभाल करे, तो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ समाज को स्वस्थ और हरा-भरा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
इस प्रकार ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल, गढ़वा में मनाया गया आयुर्वेद दिवस विद्यार्थियों के लिए ज्ञान, जागरूकता, प्रकृति प्रेम और व्यवहारिक शिक्षा का प्रेरणादायी अवसर बना। औषधीय पौधों के पौधरोपण के माध्यम से विद्यालय ने विद्यार्थियों को भारतीय आयुर्वेदिक परंपरा से परिचित कराने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवन के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। कार्यक्रम ने यह स्पष्ट किया कि यदि शिक्षा को संस्कार, स्वास्थ्य और प्रकृति से जोड़ा जाए, तो विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में सार्थक कदम उठाया जा सकता है।

