मनातू में तबादले के बाद भी वनकर्मी के जमे रहने का आरोप, अवैध वसूली और धमकाने की शिकायत

मनातू में तबादले के बाद भी डटे हैं वनकर्मी रंजीत यादव, अवैध वसूली और ग्रामीणों को धमकाने का आरोप

मनातू से अनिल कुमार की रिपोर्ट।

मनातू (पलामू )पलामू जिले के मनातू वन विभाग कार्यालय से एक गंभीर मामला सामने आया है। मनातू में पदस्थापित रहे वन कर्मी रंजीत यादव का तबादला लगभग 5-6 महीने पूर्व ही चियांकी-कुंदरी क्षेत्र में कर दिया गया था। इसके बावजूद उन्होंने अपने नए पदस्थापन स्थल पर रहने के बजाय मनातू वन विभाग कार्यालय परिसर स्थित अपने कमरे में ही अवैध रूप से कब्जा जमा रखा है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रंजीत यादव विभागीय आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए न केवल मनातू में अवैध रूप से जमे हुए हैं, बल्कि विभागीय ढुलमुल रवैये और कथित मौन सहमति का फायदा उठाकर ग्रामीणों पर रोब दिखाते हैं।

वन कर्मी जंगल और जमीन से जुड़े छोटे-मोटे कार्यों, लकड़ी कटाई या घरेलू निर्माण जैसे मामलों में आम जनता को केस में फंसाने की धमकी देता है। क्षेत्र में डर और दहशत का माहौल बनाकर नियमित रूप से ग्रामीणों से मोटी रकम ऐंठी जा रही है।ग्रामीणों का कहना है कि विरोध करने पर उन्हें वन अधिनियम के तहत झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी जाती है।

इस मनमानी से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। पीड़ित ग्रामीणों और क्षेत्र के प्रबुद्ध लोगों ने पलामू वन प्रमंडल के वरीय अधिकारियों व जिला प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों की मांग है कि रंजीत यादव से तत्काल मनातू का सरकारी आवास खाली कराया जाए और उन्हें उनके मूल तबादला स्थल कुंदरी-चियांकी भेजा जाए।

जब इस मामले में रेंजर अजय टोप्पो से संपर्क की गई तो उन्होंने कहा की अगर तबादले के बावजूद यदि वनकर्मी मनातू परिसर में ही रह रहे हैं।तो यह सरासर गलत है। विभागीय पत्र जारी कर जल्द से जल्द रूम खाली करवाया जाएगा।